निजी विश्वविद्यालयों पर सवाल: अल फलाह यूनिवर्सिटी के बाद, निगरानी तंत्र पर उठे सवाल
अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले के बाद निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे इन संस्थानों की निगरानी और विनियमन पर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, यूजीसी और अन्य नियामक एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध है, क्योंकि मान्यता मिलने के बाद विश्वविद्यालयों की उचित निगरानी नहीं की जाती है।
सूत्रों ने बताया कि नियामक एजेंसियों की निष्क्रियता के कारण ही अल फलाह यूनिवर्सिटी फर्जी रैंकिंग का दावा कर सकी। इस मामले में यूजीसी ने भी खानापूर्ति की, जैसा कि वह अक्सर फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) सहित अन्य नियामक एजेंसियों पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि वे निजी विश्वविद्यालयों को मान्यता देने के बाद उनकी गतिविधियों पर ध्यान नहीं देते हैं।
यूजीसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, उनका काम शैक्षणिक गुणवत्ता और छात्रों के हितों का ध्यान रखना है। हालांकि, अधिकारी ने स्वीकार किया कि उन्हें निजी विश्वविद्यालयों में चल रही गड़बड़ियों की जानकारी मिलने पर ही वे कार्रवाई करते हैं। निजी विश्वविद्यालयों का गठन राज्य के नियमों के तहत होता है, इसलिए इनमें राज्यों की भूमिका अधिक होती है। निजी विश्वविद्यालय नियमन के तहत राज्यपाल ही अधिकांश निजी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होते हैं।
सूत्रों के अनुसार, यूजीसी के रवैये का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2003 के बाद से इससे जुड़े नियमों में कोई सुधार नहीं किया गया है। साथ ही, निजी विश्वविद्यालयों की जांच या उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कोई मजबूत तंत्र भी नहीं है। अल फलाह विश्वविद्यालय मामले में भी यह देखने को मिला, जहां यूजीसी के नियमों के विरुद्ध ऐसे लोगों को नौकरी दी गई जो पहले से ही किसी मामले में दागी थे।
इस मामले में यूजीसी की तरह ही उच्च शिक्षा से जुड़ी एआईसीटीई, एनसीटीई और नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) जैसे नियामक भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि विश्वविद्यालयों में इन नियामकों से मान्यता लेकर ही इंजीनियरिंग, मेडिकल, शिक्षक शिक्षा से जुड़े कोर्स संचालित होते हैं।
वर्तमान में देश में करीब 540 निजी विश्वविद्यालय काम कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे भी निजी विश्वविद्यालय हैं जो सरकार व यूजीसी से वित्तीय सहायता लेते हैं। निजी विश्वविद्यालय वैसे तो देश के सभी राज्यों में हैं, लेकिन सबसे अधिक 66 निजी विश्वविद्यालय गुजरात में चल रहे हैं। वहीं, निजी विश्वविद्यालयों के मामले में दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है, जहां कुल 54 निजी विश्वविद्यालय हैं। राजस्थान में 53, उत्तर प्रदेश में 48, महाराष्ट्र में 39, उत्तराखंड में 31, कर्नाटक में 29, हरियाणा में 25, छत्तीसगढ़ और झारखंड में 18-18 और बिहार में सात निजी विश्वविद्यालय चल रहे हैं।
