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हरिद्वार अर्धकुंभ पर संतों की नाराजगी: सरकार और अधिकारियों पर उठे सवाल, परंपराओं से छेड़छाड़ का आरोप

By Nov 19, 2025

हरिद्वार में अर्धकुंभ के आयोजन को लेकर संत समाज में एक बार फिर असंतोष उभर रहा है। सूत्रों के अनुसार, भारत साधु समाज ने सरकार और प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। संतों का मानना है कि अर्धकुंभ के पौराणिक स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है, जिसे वे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

श्रीजी वाटिका में आयोजित भारत साधु समाज की बैठक में महामंडलेश्वर स्वामी रुपेंद्र प्रकाश ने इस विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रशासन को व्यवस्था बनाने पर ध्यान देना चाहिए, न कि अपनी मनमानी संतों पर थोपनी चाहिए। महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज ने पिछले कुंभ के बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि 700 करोड़ रुपये कहां गए, यह स्पष्ट नहीं है। उनका आरोप है कि अर्धकुंभ को कुंभ के रूप में आयोजित करने के पीछे केवल बजट ठिकाने लगाने की योजना है, जैसा कि पिछले कुंभ में हुआ था।

इस बैठक में भारत साधु समाज की नई कार्यकारिणी का भी गठन किया गया, जिसमें स्वामी सत्य वृत्तानंद को प्रदेश अध्यक्ष, विनोद गिरि को महामंत्री और स्वामी अमृतानंद को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। नई कार्यकारिणी ने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करने की उम्मीद जताई है। संतों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कुंभ की परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में मौजूद संतों ने सरकार के फैसलों पर असहमति जताते हुए इसे परंपराओं के विरुद्ध बताया।

कुंभ और अर्धकुंभ का स्वरूप सदियों से तय है, और इसमें किसी भी प्रकार का फेरबदल उचित नहीं है, चाहे वह राजनीतिक हो या प्रशासनिक। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज, स्वामी अमृतानंद, स्वामी राजकुमार दास, स्वामी प्रकाशनंद, महामंडलेश्वर स्वामी दिव्यानंद गिरि महाराज, स्वामी विनोद गिरी महाराज, स्वामी विरेंद्र गिरि, स्वामी कैलाश आनंद गिरि, शुभम गिरि सहित कई संत उपस्थित रहे।

यह मामला हरिद्वार में अर्धकुंभ की तैयारियों के दौरान सामने आया है, जहां प्रशासन और नगर निगम द्वारा कई कार्रवाईयां की जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, संतों का यह विरोध इस आयोजन के स्वरूप को लेकर उनकी चिंताओं को दर्शाता है। संत समाज का कहना है कि वे चाहते हैं कि कुंभ की पवित्रता और परंपराओं का पालन किया जाए, और किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि को रोका जाए जो इन परंपराओं के खिलाफ हो।

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