जिलाधिकारी बने बहनों के ‘पिता’, पढ़ाई रुकेगी नहीं, दिव्यांग को मिली ‘सारथी’
देहरादून में एक हृदयस्पर्शी घटनाक्रम में, जिलाधिकारी सविन बंसल ने दो बेसहारा बहनों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आए हैं। पिता की मृत्यु के बाद कर्ज के बोझ तले दबी और आर्थिक तंगी से जूझ रही बहनों में से एक, चित्रा की पढ़ाई पर विराम लग गया था। वहीं दूसरी बहन हेतल का भविष्य भी अनिश्चित था। ऐसे में जिलाधिकारी बंसल ने न केवल उनके लिए ‘पिता’ की भूमिका निभाई, बल्कि उनकी शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह को भी प्रशस्त किया।
एमडीडीए कॉलोनी, चंदर रोड, डालनवाला निवासी चित्रा और हेतल ने जिलाधिकारी से मिलकर अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि उनके पिता गोपाल कालरा ने व्यवसाय के लिए बैंक से ऋण लिया था, लेकिन कोरोनाकाल में व्यापार ठप होने के कारण वह ऋण की किस्तें नहीं चुका पाए। इसी आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य खराब होने के चलते 23 अक्टूबर को उनकी मृत्यु हो गई। अब बैंक घर बेचने का दबाव बना रहे हैं।
अपनी 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण चित्रा की पढ़ाई रुकने से वह बेहद परेशान थी, जबकि हेतल की एक कंपनी में इंटर्नशिप चल रही थी। उनकी मां ट्यूशन पढ़ाकर जैसे-तैसे घर का खर्च चला रही थीं। बहनों ने जिलाधिकारी से ऋण माफ करने की गुहार लगाई।
जिलाधिकारी बंसल ने तत्काल संज्ञान लेते हुए चित्रा का दाखिला एसजीआरआर विश्वविद्यालय में बी.कॉम ऑनर्स में कराया। उन्होंने न केवल उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने का भरोसा दिया, बल्कि संस्थान से भी सहयोग का अनुरोध किया। दरबार साहिब ने प्रशासन के सहयोग से चित्रा की फीस वहन करने की सहमति जताई है। जिलाधिकारी ने चित्रा को सारथी वाहन से कॉलेज भेजा और अब उसकी पढ़ाई, किताबों व आवाजाही का पूरा खर्च जिला प्रशासन और संस्थान मिलकर उठाएंगे।
इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी ने चलने-फिरने और बोलने में असमर्थ 13 वर्षीय भव्य को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से रायफल फंड से 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की, जिससे वह अपने लिए ट्राइसाइकिल खरीद सकेगी। इस सहायता से भव्य अपना ‘सारथी’ खुद बन सकेगी और अपने दैनिक कार्यों में आत्मनिर्भर हो सकेगी।
जिलाधिकारी ने ऋण माफी के संबंध में उप जिलाधिकारी न्याय एवं एलडीएम को लिए गए ऋण के बीमा पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस मानवीय पहल ने न केवल दो बहनों के भविष्य को सुरक्षित किया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि जब प्रशासन आम आदमी के साथ खड़ा होता है, तो मुश्किल से मुश्किल हालात भी आसान हो जाते हैं।
