मतदाता सूची पुनरीक्षण: 49 करोड़ से अधिक मतदाताओं को मिले गणना प्रपत्र
भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दूसरे चरण में उल्लेखनीय प्रगति की जानकारी दी है। आयोग द्वारा जारी नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, 49 करोड़ से अधिक मतदाताओं को गणना प्रपत्र सफलतापूर्वक वितरित किए जा चुके हैं। यह प्रक्रिया, जिसे एसआइआर 2.0 के नाम से जाना जा रहा है, बिहार में पहले चरण के सफल समापन के बाद अब देश के 12 प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी है।
आयोग के आंकड़ों के अनुसार, जिन नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभियान चल रहा है, वहां कुल लगभग 50.99 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 97.52 प्रतिशत मतदाताओं, यानी 49.73 करोड़ से अधिक लोगों को गणना फार्म प्राप्त हो चुके हैं। यह संख्या चुनावी प्रक्रिया में अधिक से अधिक नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एसआइआर 2.0 के तहत जिन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह पुनरीक्षण कार्य चल रहा है, उनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, राजस्थान, केरल, गुजरात, गोवा, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी जैसे राज्यों में अगले वर्ष, यानी 2026 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में यह मतदाता सूची का अद्यतनीकरण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया के लिए एक विस्तृत समय-सीमा भी निर्धारित की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह प्रक्रिया 28 अक्टूबर को शुरू हुई थी और अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि असम में अगले साल विधानसभा चुनाव होने के बावजूद वहां एसआइआर की घोषणा क्यों नहीं की गई है, इसके पीछे विशिष्ट कारण हैं जिन पर आयोग ने प्रकाश डाला है।
यह विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान मतदाताओं को अपनी जानकारी सत्यापित करने और यदि आवश्यक हो तो सुधार करने का अवसर प्रदान करता है। इसके लिए कुछ विशिष्ट दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, और यदि मतदाता के पास ये दस्तावेज नहीं होते हैं, तो उनका नाम मतदाता सूची से हटाया भी जा सकता है। आयोग ने ऐसे दस्तावेजों की एक सूची भी जारी की है, ताकि मतदाता इस प्रक्रिया में किसी भी त्रुटि से बच सकें। यह अभियान भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है कि प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार प्राप्त हो।
