शिवहर के किसानों का अदम्य साहस: बाढ़ से डूबी धान, फिर भी उम्मीदों की तलाश जारी!
शिवहर में बाढ़ ने किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुँचाया है, जिससे उनके सामने आर्थिक चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। मुआवजे की उम्मीदें कम हैं, फिर भी किसान अपनी मेहनत और हिम्मत से इस संकट से उबरने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।
शिवहर के मेहनती किसानों ने इस वर्ष मौसम की अनिश्चितताओं का सामना करते हुए अपनी धान की फसल के लिए अथक प्रयास किए। पहले कम बारिश और सूखे की चुनौतियों के बावजूद, किसानों ने महंगे डीजल का उपयोग कर दो-दो बार धान की रोपाई की, अपनी उम्मीदों को जीवित रखा। खेतों में जब फसलें तैयार होने लगी थीं, तभी 28 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आई अप्रत्याशित बाढ़ और भारी बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया।
पिपराही, तरियानी, पुरनहिया और डुमरी कटसरी जैसे इलाकों में सैकड़ों एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई, जिससे हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो गई। किसान अरुण कुमार जैसे कई लोगों की लगभग 80% फसल नष्ट हो गई है। ऐसे में किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है। कृषि विभाग क्षति का आकलन कर रहा है, लेकिन 33% से कम क्षति पर मुआवजे के प्रावधान की सीमा से कई किसान निराश हैं।
हालांकि, शिवहर के किसान अपनी चुनौतियों के बावजूद हिम्मत नहीं हार रहे हैं। वे पूरे जिले को बाढ़ प्रभावित घोषित करने और उचित मुआवजे के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं, ताकि वे इस संकट से उबर सकें और भविष्य की खेती के लिए नई ऊर्जा के साथ तैयारी कर सकें। उनकी अदम्य भावना और सामूहिक प्रयास निश्चित रूप से उन्हें इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने में मदद करेंगे।
Source: Jagran
