बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को मौत की सजा: मानवता के खिलाफ अपराधों का आरोप
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) के एक न्यायाधीश ने सोमवार को बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को 2024 के विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। हसीना, जो हिंसक छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच 2024 में इस्तीफा देकर भारत चली गई थीं, पर युद्ध अपराधों का आरोप तय किया गया है। न्यायाधिकरण आज हसीना, पूर्व गृह मंत्री असादुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून के खिलाफ जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के संबंध में अपना फैसला सुना रहा है।
78 वर्षीय हसीना अभी भी भारत में निर्वासन में हैं और उन्होंने मुकदमे का सामना करने के लिए लौटने के आदेशों की अवहेलना की है। असादुज्जमां खान कमाल भी फरार हैं, जबकि अब्दुल्ला अल-मामून, जो अब हिरासत में हैं, ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और सरकारी गवाह बन गए हैं।
फैसला सुनाते हुए, मूल रूप से हसीना की अपनी सरकार के तहत स्थापित न्यायाधिकरण ने कुछ सनसनीखेज टिप्पणियां कीं, जिसमें कहा गया कि हसीना ने प्रदर्शनकारियों की हत्याओं का आदेश दिया और यहां तक कि उन्हें चिकित्सा सहायता से भी वंचित रखा। इसमें कहा गया है कि छात्रों की बात सुनने और उनकी मांगों को पूरा करने के बजाय, हसीना ने उनके आंदोलन को कमजोर किया।
अदालत ने कहा, “यह बिल्कुल स्पष्ट है कि हसीना ने अपने कार्यकर्ताओं को उकसाया और विरोध कर रहे छात्रों को मारने का आदेश दिया।”
अदालत ने आगे कहा, “न्यायाधिकरण ने यह भी देखा है कि एक यूट्यूब चैनल पर एक अन्य साक्षात्कार में, हसीना ने देश के नेता के रूप में जो हुआ उसके लिए अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की।”
अभियोजन पक्ष ने हसीना के खिलाफ पांच आरोप दायर किए हैं, जिनमें हत्या को रोकने में विफलता भी शामिल है, जो बांग्लादेशी कानून के तहत मानवता के खिलाफ अपराधों के बराबर है।
ह हसीना ने स्वयं इन आरोपों का कड़ा खंडन किया है, मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण को “कंगारू अदालत” करार दिया है। अपनी अवामी लीग के समर्थकों को एक ऑडियो संदेश में, 78 वर्षीय अवामी लीग प्रमुख ने आरोपों को झूठा बताया और देश में अराजकता के लिए मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस को दोषी ठहराया।
रविवार को सुनवाई से पहले उन्होंने कहा था, “उन्हें जो भी फैसला सुनाना है, सुनाने दें। इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। अल्लाह ने मुझे यह जीवन दिया है, और केवल वही इसे समाप्त कर सकता है। मैं अभी भी अपने लोगों की सेवा करूंगी।”
