दिल्ली ब्लास्ट केस: डॉक्टरों के आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश, सुसाइड बॉम्बर की तलाश में थे
दिल्ली लाल किला ब्लास्ट मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने आतंकी डॉ. उमर नबी से जुड़े कुछ लोगों को हिरासत में लिया है, जिसके बाद डॉक्टरों के एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि यह मॉड्यूल पिछले साल से एक आत्मघाती हमलावर की तलाश में सक्रिय था। इस मॉड्यूल की कमान कथित तौर पर डॉ. उमर नबी के हाथों में थी, जो लगातार अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहा था। कट्टरपंथी नबी का मानना था कि मॉड्यूल में एक आत्मघाती हमलावर का होना अनिवार्य है।
अधिकारियों ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों में काजीगुंड का जसीर उर्फ दानिश भी शामिल है। जसीर के बयान के अनुसार, अक्टूबर 2023 में उसकी मुलाकात कुलगाम की एक मस्जिद में इस डॉक्टरों वाले आतंकी मॉड्यूल से हुई थी। इसके बाद उसे हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी ले जाया गया, जहां उसे एक किराए के कमरे में रखा गया। शुरुआती तौर पर मॉड्यूल चाहता था कि जसीर ओवर-ग्राउंड वर्कर (OGW) के तौर पर काम करे, लेकिन डॉ. उमर नबी ने कई महीनों तक उसे आत्मघाती हमलावर बनने के लिए ब्रेनवॉश करने की कोशिश की। हालांकि, जसीर ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति और इस्लाम में आत्महत्या को ‘हराम’ बताने का हवाला देकर आत्मघाती हमलावर बनने से साफ इनकार कर दिया, जिससे मॉड्यूल की यह खतरनाक योजना विफल हो गई।
गौरतलब है कि दिल्ली के सुभाष मार्ग सिग्नल पर 10 नवंबर को हुए विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। घायलों में से तीन की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इस मामले की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, दिल्ली ब्लास्ट की एक अन्य संदिग्ध आतंकी लखनऊ की डॉ. शाहीन सईद भी इस मॉड्यूल से जुड़ी हुई थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि शाहीन पिछले 10 साल से पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी हुई थी और उसने 2015 में इस संगठन का दामन थामा था। 2021 में जब एक रिश्तेदार ने डॉ. शाहीन को उसके पति, बच्चे और नौकरी छोड़ने पर टोका था, तो उसने जवाब दिया था कि परिवार और नौकरी में क्या रखा है, बहुत अपने लिए जी लिए, अब कौम का कर्ज उतारने का समय है।
खुफिया एजेंसियों ने डॉ. उमर, मुजम्मिल और शाहीन को मिले 20 लाख रुपए के फंड ट्रेल का भी खुलासा किया है। सूत्रों के अनुसार, यह पैसा संभवतः हवाला नेटवर्क के जरिए जैश-ए-मोहम्मद के एक हैंडलर द्वारा भेजा गया था। इन खुलासों से सफेदपोश आतंकियों के नेटवर्क और उनकी फंडिंग के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जिसकी गहन जांच जारी है।
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