सीएम योगी के नेतृत्व में बदली अयोध्या की तस्वीर, दीपोत्सव ने रचा 26 लाख दीपकों का नया इतिहास
उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से अयोध्या की तस्वीर में एक उल्लेखनीय बदलाव आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रामनगरी ने अपने त्रेतायुगीन वैभव को पुनः प्राप्त किया है, और दीपोत्सव के माध्यम से इसे विश्व मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। इस वर्ष, दीपोत्सव के नौवें संस्करण में 26 लाख से अधिक दीये जलाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया गया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।
योगी सरकार ने वर्ष 2017 में भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास से लौटने और लंका विजय की खुशी को अयोध्यावासियों के साथ मनाने का निर्णय लिया था। उस समय, दीपोत्सव के प्रथम अध्याय में 1.71 लाख दीये प्रज्वलित कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया था। यह पहल धीरे-धीरे रामभक्तों के आकर्षण का केंद्र बनती चली गई। पांच सौ वर्षों के संघर्ष के प्रतिफल के रूप में जब जन्मभूमि पर रामलला विराजमान हुए, तो दीयों की संख्या में लगातार वृद्धि होती गई, और यह आयोजन देश-दुनिया के भक्तों को अयोध्या आमंत्रित करने लगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पौने दो लाख प्रज्वलित दीयों से शुरू हुआ दीपोत्सव का यह सफर अब अपने नौवें संस्करण में 26 लाख 11 हजार 101 दीपकों तक पहुंच चुका है। हर वर्ष प्रदेश सरकार ने दीपोत्सव के आकर्षण को बढ़ाने के लिए नया लक्ष्य तय किया और स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर संस्करण में उपस्थित रहकर रामनगरी का उत्साहवर्धन करते रहे। वर्ष 2018 में तीन लाख एक हजार दीये, 2019 में 4.04 लाख दीये, 2020 में 6.06 लाख दीप, 2021 में 9.41 लाख दीये, 2022 में 15.76 लाख दीये, 2023 में 22.23 लाख दीये और 2024 के आठवें संस्करण में 25 लाख 12 हजार 585 दीये प्रज्वलित कर नए कीर्तिमान स्थापित किए गए।
इस बार के नौवें संस्करण में 26 लाख 11 हजार 101 दीयों को प्रज्वलित कर रामनगरी ने एक बार फिर इतिहास रचा। अयोध्या दीपोत्सव समारोह के दौरान दो नए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स भी बने, जिसके प्रमाण पत्र स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राप्त किए। मुख्यमंत्री ने राम राज्याभिषेक के बाद संतों को सम्मानित करते हुए कहा कि अयोध्या के हर कण में मर्यादा और हर दीप में दया समाहित है। संतों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि योगी ने विक्रमादित्य की परंपरा को पुनर्जीवित किया है। दीपोत्सव अब अयोध्यावासियों के लिए एक महत्वपूर्ण उत्सव और वैश्विक पहचान बन चुका है।
