अयोध्या में नवें दीपोत्सव का दिव्य आलोक: सीएम योगी ने खींचा श्रीराम का रथ
अयोध्या नगरी रविवार की शाम नवें दीपोत्सव के भव्य आयोजन के साथ एक बार फिर त्रेता युग में सिमट गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं प्रभु श्रीराम के रथ को खींचकर और उनका प्रतीकात्मक राज्याभिषेक कर इस अविस्मरणीय पल को और भी दिव्य बना दिया। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में, पूरी अयोध्या नगरी दीपों की अनगिनत पंक्तियों से जगमगा उठी, जिससे चहुँ ओर एक अलौकिक आभा व्याप्त हो गई।
रामकथा पार्क में प्रभु श्रीराम और माता सीता के प्रतीकात्मक अवतरण के साथ ही पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी नारों से गूँज उठा। जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों के साथ प्रभु श्रीराम के रथ को खींचना शुरू किया, श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुँच गया। इस दौरान संतों ने राम दरबार पर पुष्पवर्षा कर अपनी श्रद्धा अर्पित की, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने संतों का वस्त्र एवं माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया। पुष्पक विमान (प्रतीकात्मक) के अवतरण के साथ ही लोगों ने जय श्रीराम का उद्घोष करना शुरू कर दिया था।
पुष्पवर्षा और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच, मुख्यमंत्री ने गुरु वशिष्ठ के साथ भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान का विधिवत पूजन और वंदन किया। स्वर्ण सिंहासन, रथ, अश्व और सुसज्जित राजसभा ने मानो त्रेता कालीन रामराज्य को साक्षात धरती पर उतार दिया। मुख्यमंत्री योगी ने सबसे पहले भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान जी को माला पहनाई, जिसके बाद वे रथ पर सवार हुए और सीएम योगी ने स्वयं रथ को खींचकर आगे बढ़ाया। संतों ने भी इस पुण्य कार्य में उनका सहयोग किया। इसके उपरांत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीराम की आरती उतारी और प्रतीकात्मक राज्याभिषेक संपन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जयवीर सिंह और राकेश सचान ने भी मंच पर पहुँचकर राम दरबार का पूजन-अर्चन किया। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित अनेक संत, महंत, जनप्रतिनिधि और भाजपा पदाधिकारी इस भव्य आयोजन के साक्षी बने। रामकथा पार्क से लेकर राम की पैड़ी, धर्मपथ, लता चौक और हनुमानगढ़ी तक, दीपों की झिलमिलाती पंक्तियों ने पूरी रामनगरी को दिव्य आलोक में नहला दिया। हर गली, हर घाट और हर भवन ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूँज रहा था। श्रद्धालु इस अनुपम दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते हुए भक्ति गीतों में लीन थे।
दीपोत्सव 2025 (जैसा कि मूल इनपुट में दिया गया है) ने न केवल भव्यता का एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया, बल्कि अयोध्या मॉडल के रूप में एक नया मानक भी तय किया। सुरक्षा, स्वच्छता और अनुशासन के बीच आस्था, संस्कृति और आधुनिकता का यह सुंदर समन्वय विश्व के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। दीपों से आलोकित अयोध्या का यह दृश्य वर्षों तक स्मृतियों में अंकित रहेगा और यह सिद्ध करता है कि अयोध्या केवल एक नगर नहीं, बल्कि जीवंत आस्था की वह ज्योति है, जो मानवता के पथ को सदैव प्रकाशित करती रहेगी।
