जानिए क्या होती है SEM कोर्ट और कैसे तय होती है इसमें सुनवाई | national news
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था तोड़ने के आरोप में गिरफ्तार किए गए सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद अब मामले की सुनवाई एसईएम कोर्ट में की जा रही है। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई थी, जहां अदालत द्वारा वैकल्पिक उपाय मौजूद होने पर सवाल उठाए जाने के बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली थी। इसके बाद पूरा मामला एक बार फिर विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पाले में आ गया है।
आखिर क्या होती है एसईएम कोर्ट
एसईएम यानी स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत सामान्य अदालतों से काफी अलग होती है। इनका मुख्य काम किसी भी तरह की संभावित शांतिभंग की घटना को रोकना और एहतियाती कदम उठाना होता है। सामान्य अदालतों की तरह ये आपराधिक मुकदमों की सुनवाई नहीं करतीं और न ही इनके पास पूर्ण न्यायिक शक्तियां होती हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत इन्हें सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए एहतियातन बॉन्ड भरवाने का अधिकार प्राप्त होता है।
सामान्य अदालतों से बुनियादी अंतर
पारंपरिक रूप से एसईएम प्रशासनिक या राजस्व अधिकारी होते हैं जो सरकार के अधीन कार्य करते हैं, जबकि न्यायिक मजिस्ट्रेट पूरी तरह न्यायपालिका के नियंत्रण में होते हैं। एसईएम का कार्यालय कई बार पुलिस थाने के भीतर भी संचालित होता है, जिसके कारण इसे कई लोग पुलिस कोर्ट के रूप में भी देखते हैं। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक स्तर पर कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित रखना है, जिससे आम जनता में प्रशासनिक पारदर्शिता और न्याय प्रक्रिया को लेकर अक्सर चर्चा बनी रहती है।
