राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर मोहन भागवत का बड़ा बयान, वैश्विक साजिशों और आंतरिक सुरक्षा पर दी चेतावनी | national news
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश के सामाजिक और वैचारिक परिदृश्य पर खुलकर बात की। उन्होंने अपने संबोधन में वैश्विक उथल-पुथल, आधुनिक तकनीक, और देश के भीतर हो रहे आंदोलनों को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिए।
वैश्विक साजिशों और आंदोलनों पर दो टूक
संघ प्रमुख ने फ्रांस, बांग्लादेश, नेपाल और अल्बानिया जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया भर में ‘रिजीम चेंज’ के नाम पर साजिशें रची जा रही हैं, जिनसे प्रगतिशील देश भी परेशान हैं। उन्होंने चेताया कि भारत को कमजोर करने और आंतरिक कलह पैदा करने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में आंदोलन का अधिकार है, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान खोजना होना चाहिए, न कि समाज में द्वेष, नफरत या विभाजन पैदा करना। सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है।
एआई और नई पीढ़ी की भूमिका
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक विज्ञान पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि तकनीक का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन इसका उपयोग पूरी नैतिकता और विवेक के साथ मानव कल्याण के लिए होना चाहिए। तकनीक जीवन को बेहतर बनाने का साधन है, स्वयं जीवन का उद्देश्य नहीं। इसके साथ ही उन्होंने नई पीढ़ी यानी Gen-Z से अपील की कि वे समस्याओं का हिस्सा बनने के बजाय उनका समाधान बनें और देश की प्रगति में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं। इस तरह के वैचारिक संदेशों के जरिए उन्होंने देशवासियों को एकजुटता और आपसी सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया है।
