जेएनयू में छात्रों की भूख हड़ताल का 17वां दिन, सांसद ने राष्ट्रपति और शिक्षा मंत्री से की दखल की मांग | jnu hunger strike
दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पिछले 17 दिनों से छात्रों की भूख हड़ताल जारी है, जिससे परिसर का माहौल गरमा गया है। छात्रों के स्वास्थ्य में लगातार आ रही गिरावट को देखते हुए राजनीतिक हलकों में भी चिंता बढ़ गई है। इसी क्रम में राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप करने की अपील की है।
सांसद ने अपने पत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने निर्वाचित छात्र संघ प्रतिनिधियों के निष्कासन को तुरंत प्रभाव से रद्द करने की मांग की है। इसके अलावा, चीफ प्रॉक्टर ऑफिस मैनुअल के उन विवादास्पद प्रावधानों को हटाने पर जोर दिया गया है, जिनके तहत प्रदर्शनों और सभाओं पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
शैक्षणिक संस्थानों में असहमति की आवाज को दबाए जाने पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि इससे परिसरों की लोकतांत्रिक संस्कृति प्रभावित होती है। जेएनयू अधिनियम 1966 का हवाला देते हुए राष्ट्रपति से विजिटर के रूप में अपने अधिकारों का उपयोग करने का अनुरोध किया गया है। छात्रों का यह आंदोलन यदि समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो इससे व्यापक स्तर पर शैक्षणिक अशांति फैल सकती है, जिसका असर छात्र समुदाय के भविष्य पर पड़ेगा।
