काला धन पकड़ने से ज्यादा अहम पीड़ितों को रकम वापस मिलना | national news
नई दिल्ली में आयोजित एसेट रिकवरी इंटरजेंसी नेटवर्क, एशिया पैसिफिक (ARIN-AP) की 11वीं सालाना बैठक के दौरान वित्तीय अपराधों और उनकी रिकवरी को लेकर एक बेहद अहम मुद्दा उठाया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक राहुल नवीन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि करोड़ों रुपये का काला धन पकड़ने का तब तक कोई औचित्य नहीं है, जब तक वह रकम वास्तव में पीड़ित तक न पहुंचे। भारत की अध्यक्षता में हुई इस तीन दिवसीय बैठक का मुख्य विषय ‘क्राइम के पैसे को खोजने से लेकर लौटाने तक का सफर’ था।
राहुल नवीन ने अपने संबोधन में कहा कि जनता कानून व्यवस्था की सफलता का आकलन इस बात से करती है कि एजेंसियों ने कितना पैसा वापस दिलाया है, न कि इस बात से कि कागजों पर कितनी संपत्ति जब्त की गई है। उन्होंने व्यवस्था की एक बड़ी खामी की ओर इशारा करते हुए बताया कि जांच एजेंसियां सिर्फ संपत्ति ढूंढने में जुटी रहती हैं, वकील अदालती आदेशों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और कस्टडी मैनेजर संभाल में लगे रहते हैं, जबकि इस पूरी प्रक्रिया के बीच पीड़ित व्यक्ति न्याय के लिए लंबा इंतजार करता रह जाता है।
बैठक के दौरान आधुनिक वित्तीय अपराधों और खासकर क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते इस्तेमाल पर भी गंभीर चिंता जताई गई। अपराधियों द्वारा वर्चुअल करेंसी के जरिए पलक झपकते ही अवैध धन को देश से बाहर भेजने के मामलों से निपटने के लिए त्वरित ब्लॉकचेन एनालिटिक्स और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को अनिवार्य बताया गया। इसके अलावा, बिना सजा के संपत्ति जब्ती के कानूनी प्रावधानों और जब्त संपत्तियों के समय पर रखरखाव को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंचों के सक्रिय होने से सीमा पार छिपे वित्तीय अपराधियों पर शिकंजा कसना आसान होगा। जब विभिन्न देश आपसी सहयोग और औपचारिक कानूनी प्रक्रियाओं को मजबूत करेंगे, तो न केवल काले धन की रिकवरी में तेजी आएगी, बल्कि आम नागरिकों और पीड़ितों का न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा भी और अधिक गहरा होगा।
