स्मार्टफोन महंगे होने की असली वजह, एआई का असर या कंपनियों की मुनाफाखोरी | technology news
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में बजट सेगमेंट के ग्राहकों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कुछ समय पहले तक जो बेहतरीन फीचर्स वाले फोन दस हजार रुपये के दायरे में मिल जाते थे, उनके लिए अब पंद्रह से बीस हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं [technology news]। वीवो, सैमसंग, शाओमी और रियलमी जैसे बड़े ब्रांड्स के नए मॉडल्स की कीमतें लगातार ऊंची हो रही हैं, जिससे आम आदमी की पहुंच से अच्छे विकल्प दूर होते जा रहे हैं।
इस पूरी स्थिति के पीछे रैम और स्टोरेज में इस्तेमाल होने वाली DRAM और NAND जैसी मेमोरी की कीमतों में आया भारी उछाल है। ग्लोबल स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर्स की मांग तेजी से बढ़ने के कारण मेमोरी चिप्स का पूरा सप्लाई चेन प्रभावित हुआ है। जब लागत में बड़ा इजाफा होता है, तो टेक कंपनियों के लिए पुराने दामों पर डिवाइस बेचना असंभव हो जाता है। उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियों का मुनाफा प्रभावित होता है, जिसकी भरपाई अक्सर अंतिम कीमत बढ़ाकर की जाती है।
हालांकि, केवल एआई और मेमोरी की महंगाई ही एकमात्र कारण नहीं है। जानकारों का मानना है कि इसमें कंपनियों की व्यावसायिक नीतियां और मार्जिन तय करने के तरीके भी अहम भूमिका निभाते हैं। जब भी बाजार में इस तरह का दबाव बनता है, तो सबसे ज्यादा मार बजट सेगमेंट पर पड़ती है, क्योंकि पंद्रह हजार रुपये से कम कीमत वाले फोन का गणित पूरी तरह बदल चुका है। इस बदलाव से ग्राहकों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है और किफायती तकनीक पाना कठिन होता जा रहा है।
