घर में सीढ़ियों की सही संख्या और वास्तु नियम जानिए | vastu tips
नया मकान बनाते समय लोग आमतौर पर कमरों की दिशा, मुख्य द्वार और रसोई की स्थिति पर विशेष ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार सीढ़ियों की बनावट और उनकी संख्या को नजरअंदाज कर दिया जाता है। पारंपरिक वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर के भीतर सीढ़ियों के पायदानों की संख्या का सीधा प्रभाव वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ता है। सही संख्या होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और आर्थिक व मानसिक स्थिरता आती है।
वास्तु शास्त्र में सीढ़ियों की सही संख्या तय करने के लिए एक विशेष पैमाना बताया गया है जिसे इंद्र-यम-राज फॉर्मूला कहा जाता है। इस विधि के तहत सीढ़ियों की कुल संख्या को 3 से विभाजित किया जाता है। यदि भाग देने के बाद शेषफल 2 बचता है, तो उस संख्या को बेहद शुभ माना जाता है। इसी गणितीय क्रम के आधार पर 5, 8, 11, 14, 17, 20, 23, 26 और 29 जैसी संख्याओं को अनुकूल माना गया है। उदाहरण के तौर पर, यदि सीढ़ियों की संख्या 8 या 11 है, तो 3 से भाग देने पर शेष 2 ही बचता है।
सीढ़ियों की गिनती करते समय केवल ऊपर दिखने वाले पायदानों को गिनना पर्याप्त नहीं माना जाता है। जानकारों के मुताबिक, इसमें राइजर यानी एक कदम से दूसरे कदम की ऊंचाई वाले हिस्से को आधार बनाया जाता है। ऊपरी मंजिल की लैंडिंग तक पहुंचने वाले सभी राइजर इस गणना में शामिल होते हैं। शून्य पर समाप्त होने वाली संख्या जैसे 10 या 20 को लेकर वास्तु में कुछ अलग मान्यताएं भी हैं, क्योंकि इन्हें गतिहीनता से जोड़ा जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वास्तु नियमों के चक्कर में घर के व्यावहारिक ढांचे और सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहिए। सीढ़ियों की चौड़ाई, ऊंचाई, रेलिंग की मजबूती और मंजिल की कुल ऊंचाई का आकलन करना सबसे जरूरी है। एक संतुलित और सुरक्षित निर्माण ही परिवार के सदस्यों के लिए सुविधाजनक साबित होता है, इसलिए वास्तु के साथ इंजीनियरिंग मानकों का तालमेल बिठाना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। (vastu tips)
