पितृपक्ष के पहले दिन वृद्धाश्रम पहुंचे पांच बुजुर्ग, एक दंपत्ति को बच्चों ने लिया वापस | agra news
पितृपक्ष के पावन पर्व की शुरुआत के साथ ही समाज का एक कड़वा और संवेदनशील सच सामने आया है। एक तरफ जहां लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ शहर के एक वृद्धाश्रम की चौखट पर पांच ऐसे बुजुर्ग पहुंचे जिन्हें उनके अपनों ने ही बेसहारा छोड़ दिया था। [agra news]
सिकंदरा स्थित रामलाल वृद्धाश्रम में पहुंचे इन बुजुर्गों में अलग-अलग इलाकों के लोग शामिल हैं। किसी को परिवार द्वारा मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया गया था तो कोई बुढ़ापे की लाचारी में अपनों की बेरुखी का शिकार होकर यहां पहुंचा। भूखे पेट आश्रम पहुंचे इन बुजुर्गों को भले ही छत और भोजन का सहारा मिल गया, लेकिन यह घटना समाज की पारिवारिक संवेदनाओं पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है कि जिन माता-पिता ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उन्हें बुढ़ापे में दर-दर भटकने के लिए क्यों छोड़ दिया जाता है।
हालांकि, इसी दिन एक सुखद तस्वीर भी देखने को मिली जब किरावली के रहने वाले एक बुजुर्ग दंपत्ति को उनके बच्चों ने गलती का अहसास होने पर सम्मानपूर्वक वापस घर ले लिया। उन्होंने अपने जीवित माता-पिता के साथ ही पितृपक्ष के अनुष्ठान पूरे करने का निर्णय लिया। इस दोहरी घटना ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मृत पूर्वजों की पूजा करने से ज्यादा जरूरी जीवित माता-पिता की सेवा करना है, क्योंकि उनकी कांपती उंगली थामना ही सबसे बड़ा तर्पण है।
