लोकेशन डेटा के दुरुपयोग पर गूगल पर लगा भारी जुर्माना, यूरोपीय संघ की कार्रवाई | world news
डिजिटल गतिविधियों और स्मार्टफोन लोकेशन की जानकारी जुटाने को लेकर टेक कंपनियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। इसी कड़ी में यूरोपीय संघ ने गूगल पर 403 मिलियन यूरो यानी करीब 463 मिलियन डॉलर का भारी-भरकम जुर्माना ठोका है। यूरोपीय यूनियन के डेटा प्राइवेसी नियामक ने स्पष्ट किया है कि कंपनी ने यूजर्स के लोकेशन डेटा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से प्रोसेस नहीं किया था। यह पूरा मामला आयरलैंड की राजधानी डबलिन से सामने आया है, जहां यूरोपीय यूनियन के 27 देशों के लिए गूगल का हेडक्वार्टर स्थित है [world news]।
करीब छह साल चली इस लंबी पड़ताल में मुख्य रूप से यह जांचा गया कि क्या कंपनी ने यूरोपीय संघ के सख्त प्राइवेसी कानून यानी जीडीपीआर के नियमों का सही ढंग से पालन किया है या नहीं। जांच के दायरे में गूगल की तीन प्रमुख सेवाएं विशेष तौर पर रहीं, जिनमें वेब एंड ऐप एक्टिविटी, लोकेशन हिस्ट्री और एंड्रॉयड का लोकेशन एक्यूरेसी फीचर शामिल हैं। नियामक का मानना है कि इन फीचर्स के जरिए डेटा के इस्तेमाल का तरीका नियमों के विपरीत था। इस प्रकार की कार्यवाहियों से यह सुनिश्चित होता है कि आम नागरिकों की निजी और संवेदनशील जानकारियों का दुरुपयोग न हो सके।
भारी जुर्माने के बाद कंपनी की ओर से सफाई दी गई है कि यह पूरा मामला पुरानी नीतियों से जुड़ा हुआ है, जिन्हें अब बदला जा चुका है। उनका कहना है कि साल 2019 के बाद से नियमों में कई बड़े सुधार किए गए हैं और यूजर्स को अपनी डिजिटल गतिविधियों और लोकेशन को मैनेज करने के लिए बेहतर टूल्स प्रदान किए गए हैं। हालांकि, नियामक का तर्क है कि लोकेशन डेटा के जरिए किसी भी व्यक्ति की निजी जिंदगी के बेहद करीब तक पहुंचा जा सकता है, इसलिए पारदर्शिता बरतना अनिवार्य है।
