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पाकिस्तान में क्यों गूंजती है भगवान कृष्ण पर बनी यह प्रसिद्ध कव्वाली | world news

By Sep 19, 2026

राजनीतिक सरहदों और कड़वाहटों के बीच कला और संगीत ने हमेशा दिलों को जोड़ने का काम किया है। पाकिस्तान की जमीन पर रची और गाई गई भगवान श्रीकृष्ण की एक विशेष कव्वाली इन दिनों सोशल मीडिया पर खासी चर्चा में है। यह इस बात का प्रमाण है कि गहरी आस्था और प्रेम की भावनाओं पर सरहदें कभी पाबंदियां नहीं लगा सकतीं। [world news]

कराची के जाने-माने फनकारों उस्ताद फरीद अयाज और अबू मोहम्मद ने जब भगवान कृष्ण को समर्पित इस रचना को अपनी आवाज दी, तो सुनने वालों की रोंगटे खड़े हो गए। मूल रूप से दक्खन के सूफी शायर नवाब सादिक जंग बहादुर हिल्म द्वारा रची गई इस कव्वाली में कृष्ण को आराध्य के साथ-साथ एक महबूब के रूप में याद किया गया है। सूफिज्म की यह अनूठी परंपरा साबित करती है कि प्रेम और भक्ति का मार्ग हर तरह की औपचारिकताओं और सीमाओं से परे होता है।

इस कव्वाली के जरिए वियोग और प्रेम की ऐसी भावनाएं व्यक्त की जाती हैं, जो किसी भी धर्म या मजहब की दीवार से ऊपर उठकर सीधे दिल को छू लेती हैं। जब सूफी संगीत के ये सुर गूंजते हैं, तो सुनने वाला हर शख्स अपनी पहचान भूलकर केवल एक प्रेमी के रूप में नजर आता है। इस तरह की कलात्मक प्रस्तुतियां आम जनमानस के बीच शांति और सद्भाव का संदेश देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

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