कानपुर देहात के पंचायत घर में बनी लाइब्रेरी पर लगा ताला, युवाओं की पढ़ाई हो रही प्रभावित | kanpur news
ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अनुकूल माहौल देने के बड़े-बड़े दावे उस वक्त खोखले साबित होते नजर आए, जब कानपुर देहात के झींझक विकास खंड स्थित बनीपारा जिनई गांव का सच सामने आया। यहां लाखों रुपये की सरकारी लागत से पंचायत घर के भीतर आधुनिक सुविधाओं से लैस एक लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया था। उद्देश्य साफ था कि गांव के युवाओं को शहर भटके बिना स्थानीय स्तर पर ही पठन-पाठन के बेहतरीन संसाधन मिल सकें। लेकिन वर्तमान में यह पुस्तकालय प्रशासनिक उदासीनता और उपेक्षा का शिकार होकर केवल ताले के पीछे कैद रह गया है।
देखरेख के अभाव में पुस्तकालय के भीतर रखी कीमती किताबें और अन्य शिक्षण सामग्रियां धूल फांकने को मजबूर हैं। स्थानीय युवाओं का कहना है कि जब यह लाइब्रेरी शुरू हुई थी, तब बड़ी संख्या में छात्र नियमित रूप से यहां आकर पढ़ाई करते थे। गांव में ही ऐसा शैक्षणिक माहौल मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को काफी राहत मिली थी। लेकिन पिछले कई महीनों से ताला न खुलने के कारण अब छात्रों को या तो घर पर ही सीमित संसाधनों में जुझना पड़ रहा है या फिर महंगे शहरों में जाकर कमरे किराए पर लेने पड़ रहे हैं। इस लचर व्यवस्था के कारण ग्रामीण वर्ग के युवाओं में स्थानीय प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।
जनता से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर जब स्थानीय स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि वे त्वरित संज्ञान लेंगे, तो केवल आश्वासन ही हाथ लगते हैं। ग्रामीणों ने कई बार इस समस्या से अवगत कराया, परंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही का सीधा असर ग्रामीण विकास और युवा पीढ़ी के भविष्य पर पड़ता है। इलाके के लोगों ने अब उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस पुस्तकालय का ताला जल्द से जल्द खुलवाया जाए और नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि छात्र बिना किसी बाधा के अपने सपनों को नई उड़ान दे सकें। [kanpur news]
