राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह गुजरात शिफ्ट होने पर घमासान, परेश रावल ने किया बचाव | bollywood news
देश के सबसे प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन इस बार परंपरा से हटकर नई दिल्ली की बजाय गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में किए जाने की तैयारी है। 72 साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब यह आयोजन राजधानी से बाहर हो रहा है। इस बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं [bollywood news]।
राज ठाकरे और संजय राउत का कड़ा विरोध
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दादासाहेब फाल्के ने भारतीय सिनेमा की नींव महाराष्ट्र में रखी थी, ऐसे में समारोह को मुंबई या अन्य राज्यों में आयोजित करने के बजाय बार-बार गुजरात ले जाना समझ से परे है। उन्होंने अमेरिका के ऑस्कर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सरकारें बदलने पर भी परंपराएं नहीं बदली जातीं। इसके अलावा, शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए कलाकारों से इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने की अपील की है।
परेश रावल का पलटवार
विवाद बढ़ता देख अभिनेता परेश रावल इस फैसले के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि गुजरात देश का ही एक हिस्सा है और राष्ट्रीय स्तर के ऐसे भव्य कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित होने चाहिए ताकि हर जगह सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ सके।
संभावित कार्यक्रम और विजेता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगामी गुजरात दौरे के दौरान ही इन पुरस्कारों के प्रदान किए जाने की संभावना है। इस बार 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के तहत फिल्म ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म चुना गया है, जबकि कार्तिक आर्यन और ममूटी को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला है। इस पूरे घटनाक्रम ने देश की सांस्कृतिक और राजनीतिक फिजा में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसका असर आने वाले दिनों में फिल्म इंडस्ट्री पर भी पड़ सकता है।
