चेक बाउंस मामले में महिला को छह महीने की सजा, साढ़े आठ लाख रुपये का जुर्माना | agra news
अदालत के कड़े रुख से वित्तीय लेन-देन के मामलों में धोखाधड़ी करने वालों को स्पष्ट संदेश मिला है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत समय पर न्याय मिलने से आम जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होता है [agra news]।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने चेक डिसऑनर से जुड़े एक पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए दीप्ति श्रीवास्तव, निवासी कोटा, राजस्थान को दोषी करार दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषी को छह महीने के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही, साढ़े आठ लाख रुपये का कुल जुर्माना भी लगाया गया है।
वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से मुकदमा दर्ज कराया गया था। शाहगंज क्षेत्र के मुरली विहार कॉलोनी निवासी जय श्रीकृष्ण लवानिया ने कोर्ट को बताया था कि पारिवारिक संबंधों के चलते आरोपी महिला को मकान निर्माण के लिए उधार राशि दी गई थी। उधार लेते समय जल्द ही पैसे वापस लौटाने का वादा किया गया था।
जब वादी ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपी ने 6.80 लाख रुपये का चेक थमा दिया। बैंक में प्रस्तुत करने पर वह चेक पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया गया। अदालत ने आदेश दिया है कि जुर्माने की कुल राशि में से 8 लाख 40 हजार रुपये वादी को दिए जाएंगे, जबकि 10 हजार रुपये राज्य सरकार के खजाने में जमा होंगे।
