लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर खराब सड़क से वाहन चालकों को हो रही परेशानी | uttar pradesh news
तेज रफ्तार और सुगम सफर के उद्देश्य से तैयार किया गया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (एनई-6) इन दिनों यात्रियों को झटके और हिचकोले देने के लिए चर्चा में है। करीब 62 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के 42 किलोमीटर के ग्रीनफील्ड हिस्से में सड़क की स्थिति कई जगहों पर बेहद खराब हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि वाहन चालक निर्धारित गति तो दूर, 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार भी लगातार बनाए रखने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। इस मार्ग पर छोटे वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, लेकिन मौजूदा स्थिति में सफर करना जोखिम भरा साबित हो रहा है।
सड़क पर जगह-जगह हुए पैचवर्क के कारण चालकों को अचानक अपनी गाड़ी की रफ्तार धीमी करनी पड़ रही है। ग्रीनफील्ड सेक्शन में 40 से अधिक स्थानों पर पैचवर्क किए जा चुके हैं, जिनमें से कुछ जगहों पर सड़क धंसने के बाद नए सिरे से निर्माण किया गया है, तो कई स्थानों पर तारकोल उखड़ने के कारण नई परत बिछाई गई है। मरम्मत के बाद सड़क की सतह पूरी तरह समतल नहीं रह गई है, जिसके चलते तेज गति से गुजरने वाले वाहन असंतुलित होने लगते हैं और यात्रियों को जोरदार झटके महसूस होते हैं [uttar pradesh news]।
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस तरह की असमान सतहें किसी बड़े हादसे को न्यौता दे सकती हैं। कानपुर से लखनऊ आने वाली लेन में सबसे ज्यादा नुकसान देखा गया है, जहां पूर्व में सड़क धंसने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। संबंधित प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही इस मार्ग पर भारी वाहनों के पूर्ण संचालन को लेकर कोई अगला निर्णय लिया जाएगा। खराब बुनियादी ढांचे के कारण रोजाना सफर करने वाले आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
