संजय दत्त के मराठी न बोलने के बयान पर maharashtra news में विवाद, येरवडा जेल का किया जिक्र
महाराष्ट्र की राजनीति और सांस्कृतिक माहौल में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब अभिनेता संजय दत्त ने एक सार्वजनिक मंच पर मराठी भाषा बोलने से सार्वजनिक रूप से मना कर दिया। मुंबई महानगर क्षेत्र के अंतर्गत ठाणे में आयोजित एक दही हांडी उत्सव के दौरान यह वाकया सामने आया, जिसका आयोजन शिवसेना के शिंदे गुट के नेता और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने किया था। इस घटना ने राज्य में भाषा के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर बहस को जिंदा कर दिया है, जिससे आम जनता के बीच सेलिब्रिटीज और आम आदमी के लिए अलग पैमानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
राजनीतिक बयानबाजी और जनता की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के दौरान जब मंत्री प्रताप सरनाईक ने मंच पर संजय दत्त से मराठी में बात करने का आग्रह किया, तो अभिनेता ने माइक संभालते हुए मजाकिया लहजे में जवाब दिया कि वह येरवडा जेल में छह साल बिताने के बावजूद मराठी भाषा नहीं सीख सके। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के विधायक नरेंद्र मेहता ने इस7मुद्दे पर शिवसेना मंत्री को घेरते हुए सवाल उठाया कि क्या भाषा के नियम केवल आम रिक्शा चालकों और टैक्सी चालकों के लिए हैं, जबकि बड़े कलाकारों को ऐसी पाबंदियों से छूट मिल जाती है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और पिछला विवादित इतिहास
इस घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में रहने के बावजूद स्थानीय भाषा न जानने वाले बड़े सितारों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि आम जनता पर भारी जुर्माने का दबाव बनाया जाता है। इसके अलावा, कार्यक्रम से निकलते वक्त संजय दत्त की एक अज्ञात व्यक्ति के साथ हुई हल्की धक्का-मुक्की और अभिनेता द्वारा उसका हाथ खींचने का वीडियो भी चर्चा का विषय बना रहा। इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र में भाषा विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया है।
