आगरा में नियमों की अनदेखी कर काटे गए 43 पेड़, agra news के तहत भूखंड मालिक पर मुकदमा दर्ज
आगरा के ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) में पर्यावरण संरक्षण के नियमों को ताक पर रखकर अंधाधुंध हरियाली को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ताजा मामला अरतौनी-अकबरा रोड का है, जहां एक निजी भूखंड पर बिना अनुमति के 43 पेड़ों पर आरी चला दी गई। इस घटना से स्थानीय स्तर पर पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंची है, जिससे आम जनता के बीच प्रदूषण और नियमों के उल्लंघन को लेकर गहरी चिंता व्याप्त हो गई है।
शुक्रवार को स्थानीय निवासियों ने इस अवैध कटाई की सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन रक्षक अखिलेश और शिवनारायण की टीम ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। जांच के दौरान वहां 39 विलायती बबूल, दो पापड़ी, एक छेकुर और एक देसी बबूल का पेड़ कटा हुआ मिला। जब विभाग ने भूखंड मालिक महेंद्र सिंघानिया से अनुमति पत्र मांगा, तो उसने अनुमति न होने की बात स्वीकार की और यहां तक कह दिया कि यह उसकी निजी भूमि है, जिस पर वह कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को सिकंदरा थाने में भारतीय वन अधिनियम और उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 के तहत औपचारिक मुकदमा दर्ज कराया। सामाजिक वानिकी के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) राजेश कुमार ने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सिकंदरा थाना प्रभारी राजीव त्यागी ने पुष्टि करते हुए कहा कि आरोप सिद्ध होने पर आरोपी को कड़े दंड का सामना करना पड़ेगा।
नियमों के मुताबिक, ताजमहल के निर्धारित दायरे में किसी भी पेड़ को काटना प्रतिबंधित है और इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय या संबंधित प्राधिकारी की लिखित अनुमति अनिवार्य है। बिना अनुमति पेड़ काटने पर एक लाख रुपये तक का भारी जुर्माना और काटे गए पेड़ों के एवज में दस गुना पौधे लगाकर पांच साल तक उनकी देखभाल करने का प्रावधान है। प्रशासन की इस कार्रवाई से अवैध कटाई करने वालों में हड़कंप मच गया है.
