रणबीर कपूर की फिल्म रामायण के मेकर्स पर गिरे गाज, janmashtami पर रावण पोस्टर शेयर करने पर मचा बवाल
फिल्म निर्माण से जुड़े हलकों में इन दिनों एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है जब रणबीर कपूर की मेगा-बजट फिल्म रामायण के आधिकारिक पेज से जनमाष्टमी के दिन रावण का पोस्टर साझा किया गया। इस घटना के सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का दौर शुरू हो गया है। आम जनता और फिल्म प्रेमियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर बनने वाली फिल्म की टीम से ऐसी चूक संभव है या यह मात्र चर्चा में बने रहने का एक सुनियोजित प्रयास है।
इस तरह की घटनाओं का फिल्मों के व्यावसायिक सफर पर गहरा असर पड़ता है। जब किसी प्रोजेक्ट के इर्द-गिर्द नकारात्मक माहौल बनता है, तो कई बार वह अनजाने में ही सही, मुफ्त की पब्लिसिटी का माध्यम बन जाता है। सिनेमा जगत का इतिहास गवाह है कि कई बार विवादों ने फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर अप्रत्याशित सफलता दिलाई है।
विवादों और नेगेटिव पब्लिसिटी का फिल्मों पर असर
किसी भी फिल्म के लिए दर्शकों की उत्सुकता सबसे बड़ा हथियार होती है। जब फिल्म किसी विवाद के चलते लगातार सुर्खियों में बनी रहती है, तो आम दर्शकों के मन में यह जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हो जाती है कि आखिर उस कृति में ऐसा क्या है जिसका इतना विरोध हो रहा है। यही जिज्ञासा बाद में सिनेमाघरों तक पहुंचने का मुख्य कारण बन जाती है।
ऐतिहासिक और सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों जैसे ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘पद्मावत’ और ‘द केरला स्टोरी’ के मामले में यह साफ तौर पर देखा गया है कि तीखे विरोध और बहसों के बावजूद इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि, जानकारों का मानना है कि विवादों का यह फायदा तभी तक मिलता है जब तक दर्शकों की मूल धारणा फिल्म के पक्ष या कम से कम तटस्थ बनी रहे। यदि विवाद नकारात्मकता की सीमा पार कर जाए, तो यह फिल्म के लिए भारी नुकसान का सौदा भी बन सकता है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि रामायण के निर्माता इस पूरे घटनाक्रम से उबरने के लिए क्या कदम उठाते हैं और यह विवाद फिल्म के प्रचार को किस दिशा में लेकर जाता है। जनता के बीच इस तरह की चर्चाओं से फिल्मों की सफलता और विफलता की रेखाएं कई बार धुंधली हो जाती हैं, जिसका सीधा असर सिनेमाघरों में बिकने वाले टिकटों पर पड़ता है।
