Mirzapur The Movie: बड़े पर्दे पर उतरी उत्तर प्रदेश की खूनी सियासत, जानिए कैसी है अली फजल और पंकज त्रिपाठी की फिल्म
लोकप्रिय ओटीटी फ्रेंचाइजी का दायरा अब बड़े पर्दे तक फैल गया है। उत्तर प्रदेश के प्रभाव और सत्ता की गद्दी के लिए होने वाले संघर्ष को दर्शाती मिर्जापुर the movie सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म का दायरा सिर्फ एक लंबे एपिसोड तक सीमित न रखकर इसे सिनेमाई कैनवास पर उतारा गया है, जिससे इसका प्रभाव और अधिक गहरा हो जाता है।
कहानी की शुरुआत वहीं से होती है जहां सत्ता की कुर्सी के लिए बंदूकें खामोश नहीं बैठतीं। कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी का दबदबा, गुड्डू पंडित यानी अली फजल का बदला और मुन्ना त्रिपाठी यानी दिव्येंदु शर्मा की वापसी इस फिल्म का मुख्य आकर्षण है। रवि किशन का नया किरदार बब्बुआ यादव इस खूनी खेल में और अधिक आक्रामकता जोड़ता है। मिर्जापुर की गलियों से शुरू होकर यह सफर राजस्थान के रेगिस्तान तक पहुंचता है, जहां पुरानी दुश्मनी नए समीकरणों से टकराती है।
पुनीत कृष्णा की लिखी पटकथा और संवाद फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। हिंसा और अंधेरे सायों के बीच अचानक आने वाला देसी हास्य दर्शकों को बांधे रखता है। हालांकि, तीन घंटे से अधिक की लंबी अवधि के कारण दूसरे हिस्से में कहानी थोड़ी सुस्त पड़ती महसूस होती है, जिसे यदि थोड़ा कसा जाता तो इसका असर और अधिक प्रभावशाली होता।
अभिनय के मोर्चे पर सभी कलाकारों ने अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। पंकज त्रिपाठी की खामोश तीव्रता और अली फजल का आक्रामक तेवर फिल्म को मजबूती देता है। उत्तर प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने पर आधारित यह फिल्म दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ एक बड़े पैमाने पर फैली अपराध की दुनिया का अहसास कराती है।
