घुटने-कंधे के पुराने दर्द से राहत: KGMU में शुरू हुई नई तकनीक
लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में मरीजों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। यहां के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) विभाग में एडवांस्ड कूल्ड रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन की अत्याधुनिक सुविधा शुरू की गई है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य उन मरीजों को राहत पहुंचाना है जो लंबे समय से घुटने और कंधे के पुराने दर्द से परेशान हैं। यह एक कम चीरे वाली प्रक्रिया है, जिससे मरीजों को बड़ी सर्जरी से बचाया जा सकता है और उन्हें लंबे समय तक दर्द से मुक्ति मिल सकती है।
यह नई उपचार पद्धति खास तौर पर घुटने के ऑस्टियो आर्थराइटिस से पीड़ित मरीजों, पुराने कंधे के दर्द वाले लोगों, और उन मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है जो चिकित्सकीय कारणों से घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) के लिए अनुपयुक्त हैं। यहां तक कि घुटना प्रत्यारोपण के बाद भी दर्द से जूझ रहे मरीजों को भी इससे लाभ मिल सकता है। हालांकि, मरीज का चयन विशेषज्ञों द्वारा गहन मूल्यांकन के बाद ही किया जाएगा।
पीएमआर विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन प्रक्रिया में, दर्द पैदा करने वाली नस के एक विशिष्ट हिस्से तक रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा पहुंचाई जाती है। यह ऊर्जा दर्द के संकेतों को मस्तिष्क तक पहुंचने से रोकने या कम करने में मदद करती है। कूल्ड रेडियोफ्रीक्वेंसी तकनीक की खासियत यह है कि यह नियंत्रित तापमान का उपयोग करके अपेक्षाकृत बड़े क्षेत्र का प्रभावी ढंग से इलाज कर सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कई मरीजों के लिए, दवाएं, फिजियोथेरेपी और अन्य पारंपरिक उपचारों के बावजूद दर्द बना रहता है। ऐसे मामलों में, यह नई तकनीक एक अतिरिक्त और प्रभावी उपचार विकल्प के रूप में सामने आई है।
इस नई सुविधा के शुभारंभ के अवसर पर विभाग में एक प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में, विशेषज्ञों ने चिकित्सकों और रेजिडेंट डॉक्टरों को मरीज के चयन की प्रक्रिया, दर्द पैदा करने वाली नसों की पहचान, उपचार की तकनीक, प्रक्रिया के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और उपचार के बाद की देखभाल के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण दिया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में नर्सिंग अधीक्षक प्रदीप गंगवार सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस नई तकनीक से मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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