लखनऊ केजीएमयू में सर्वर डाउन, मरीजों की ‘health services’ पर असर
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में शुक्रवार को सर्वर की समस्या ने एक बार फिर मरीजों और उनके तीमारदारों की मुसीबतें बढ़ा दीं। सुबह सर्वर ठप होते ही ओपीडी पंजीकरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। सुबह आठ बजे से पर्चा बनवाने के लिए कतार में लगे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जिससे लाइनें ओपीडी भवन के बाहर तक पहुंच गईं। दर्द से कराहते मरीज और बुजुर्ग तीमारदार कतारों में खड़े रहने को मजबूर थे। दिल्ली स्थित एनआईसी से जुड़ी इस तकनीकी दिक्कत ने ट्रॉमा सेंटर में भर्ती गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।
सर्वर बंद होने के कारण खून के नमूने जमा करने और पहले हो चुकी जांचों की रिपोर्ट प्राप्त करने में भी बाधा आई, जिससे मरीजों के इलाज की प्रक्रिया धीमी पड़ गई। ट्रॉमा सेंटर में रोजाना औसतन 150 से अधिक गंभीर मरीज भर्ती होते हैं, जिनके रक्त के नमूने और जांच रिपोर्ट इसी व्यवस्था पर निर्भर करते हैं। रिपोर्ट समय पर न मिलने से डॉक्टरों को भी इलाज की अगली दिशा तय करने में कठिनाई हुई। केजीएमयू की ओपीडी में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं, ऐसे में पंजीकरण व्यवस्था का प्रभावित होना सीधे तौर पर इलाज की प्रक्रिया पर असर डालता है।
इस समस्या का सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ता है, जिससे उन्हें जांच, रिपोर्ट और परामर्श के लिए अतिरिक्त इंतजार करना पड़ा। बिहार के नितिन कुमार और बरेली की सविता जैसे कई मरीजों और उनके परिजनों को जांच रिपोर्ट मिलने में देरी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। गंभीर रूप से बीमार मरीजों के परिजनों ने बताया कि समय पर रिपोर्ट न मिलने से सटीक इलाज शुरू करने में दिक्कत आ रही है।
