आरटीओ की 52 सेवाएं होंगी ऑनलाइन, ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर
परिवहन विभाग (आरटीओ) अपनी 52 प्रमुख सेवाओं को पूरी तरह से ऑनलाइन और ‘ऑटो-अप्रूव्ड’ मोड में लाने की तैयारी कर रहा है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य दलाली और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाना है। आवेदकों का सत्यापन सरकारी डेटाबेस से होगा और ओटीपी केवल पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत, निजी और नए वाणिज्यिक वाहनों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) और स्वामित्व हस्तांतरण (ओनरशिप ट्रांसफर) पूरी तरह से स्वचालित मोड में होगा। लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अनिवार्य वीडियो की अवधि को 20 मिनट से घटाकर 5 मिनट कर दिया जाएगा। हालांकि, परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट और वाहनों में तकनीकी बदलाव (मॉडिफिकेशन) जैसे कार्यों के लिए आवेदकों को अभी भी आरटीओ कार्यालय जाना होगा।
इस फैसले का उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग स्टेनोग्राफर्स संघ, उत्तर प्रदेश ट्रांसपोर्ट ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ ने विरोध किया है। उनका तर्क है कि पूरी तरह ओटीपी आधारित व्यवस्था से वाहनों के ट्रांसफर में धोखाधड़ी और डीलरों की मनमानी बढ़ सकती है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान भी हो सकता है।
यह कदम नागरिकों के लिए सुविधा बढ़ाएगा और सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आम जनता को आरटीओ कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।
