नकली दवाओं का सिंडिकेट बेनकाब, आगरा में 14 थोक दवा कारोबारी पर FIR दर्ज; Fake medicine racket busted
आगरा के दवा बाजार में नकली दवाओं का एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय पाया गया है, जिसने देश के कई राज्यों में अपनी पैठ बना ली थी। इस गिरोह द्वारा करोड़ों रुपये की नकली दवाओं की बिक्री की जा रही थी। इस मामले में 14 थोक दवा कारोबारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। यह घटना आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि जीवन रक्षक दवाएं भी नकली बेची जा रही थीं।
मामले का खुलासा तब हुआ जब टोरंट फार्मास्यूटिकल्स कंपनी ने फव्वारा थोक दवा बाजार से चोट, सूजन और दर्द निवारक ‘चाइमोरल फोर्टे’ और कैल्शियम टैबलेट ‘कैल्यिशम’ की नकली बिक्री की गोपनीय सूचना दी। सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय के नेतृत्व में हुई जांच में पाया गया कि कोलकाता के पाल ब्रदर्स को नकली दवाओं की खेप बेची गई थी। जांच के दौरान विभोर मेडिकल एजेंसी और वरदान मेडिकल एजेंसी जैसी फर्मों के नाम सामने आए, जहां से नकली दवाएं बरामद हुईं।
राजकीय विश्लेषक प्रयोगशाला, लखनऊ की रिपोर्ट में ‘चाइमोरल फोर्टे’ के एक बैच को अधोमानक और ‘एसिलोक’ को नकली घोषित किया गया। निर्माता कंपनियों ने भी इन दवाओं के नकली होने की पुष्टि की। जांच में यह भी सामने आया कि ये दवाएं विभोर मेडिकल एजेंसी से बेहद कम दामों पर खरीदी गई थीं और इनके बिल भी फर्जी थे।
इस अंतरराज्यीय गिरोह में विभोर मेडिकल एजेंसी, वरदान मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल एजेंसी और कोलकाता के पाल ब्रदर्स शामिल हैं। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। लखनऊ में ऐसे ही एक गिरोह के पकड़े जाने के बाद आगरा में भी कई संदिग्ध दवा दुकानों पर छापेमारी की गई, जहां से 35 संदिग्ध दवाओं के नमूने लिए गए और कुछ दुकानों को सील भी किया गया।
