मायावती का चंद्रशेखर पर निशाना, ‘मगरमच्छ के आंसू’ बहाने वाला बताया | UP Politics News
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मेरठ और सहारनपुर की हालिया घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन अपने स्वार्थ के लिए पीड़ित परिवारों को भड़का रहे हैं और प्रदेश का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। यह बयान भीम आर्मी प्रमुख एवं आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की ओर स्पष्ट इशारा कर रहा था। मायावती ने कहा कि ऐसे दल परेशान लोगों की भावनाओं का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करते हैं, पहले अशांति का माहौल बनाते हैं और फिर सहानुभूति जताने का प्रयास करते हैं, जिसे उन्होंने ‘मगरमच्छ के आंसू’ बहाने जैसा बताया।
मायावती ने इस बात पर जोर दिया कि दुख और पीड़ा की घड़ी में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन, चक्काजाम और राजनीतिक गतिविधियां करना न्याय पाने का सही तरीका नहीं है। उनके अनुसार, इससे पीड़ितों की समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ जाती हैं। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर संघर्ष करने की सीख दी थी। यदि निचली अदालत से न्याय न मिले तो ऊपरी अदालत में अपील की जा सकती है, क्योंकि संविधान में इसके लिए पर्याप्त व्यवस्था है। इसलिए, कानून को हाथ में लेने या सड़क पर उतरने की कोई आवश्यकता नहीं है।
जनता से डॉ. अंबेडकर के बताए शांतिपूर्ण और संवैधानिक मार्ग पर चलने की अपील करते हुए, मायावती ने कहा कि समाज को अपनी एकजुटता और वोट की ताकत को पहचानना होगा। लोकतांत्रिक तरीके से राजनीतिक भागीदारी बढ़ाकर ही स्थायी परिवर्तन संभव है।
आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही कुछ दल और संगठन सक्रिय होकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं, जिससे जनता को बचना चाहिए और किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए। मायावती ने मेरठ की ललिता गौतम हत्याकांड और सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र के लालवाला गांव में हुए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने दोहराया कि इन मामलों में कानून अपना काम कर रहा है और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया जारी है। किसी भी घटना के बाद हिंसा, सड़क जाम और टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय संविधान और कानून पर भरोसा करना ही लोकतंत्र के हित में है।
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