वीबीजीरामजी योजना में सोशल ऑडिट: अब ग्रामीण करेंगे कामों का ‘ट्रांसपेरेंसी’ ऑडिट
कानपुर में वीबीजीरामजी योजना के तहत अब कामों का सोशल ऑडिट ग्रामीणों द्वारा किया जाएगा, जो योजना में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पहले जहां यह ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट के माध्यम से होता था, वहीं अब ग्रामीणों को सीधे इसमें शामिल किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत, ऑडिट से 15 दिन पहले पंचायत सचिव सभी आवश्यक बिल, मस्टर रोल, वाउचर और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड करेंगे। मुनादी, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे माध्यमों से पूरे गांव को ऑडिट की तारीख और समय की जानकारी दी जाएगी। ऑडिट प्रक्रिया में 50 फीसदी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, और इसकी अध्यक्षता प्रधान के बजाय गांव का कोई आम व्यक्ति करेगा, जिससे सभी के सामने हिसाब-किताब पारदर्शी तरीके से हो सके।
परियोजना अधिकारी आलोक कुमार के अनुसार, इस नई योजना में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, जिससे काम और भुगतान से लेकर पूरी व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। ‘रियल टाइम मस्टर रोल’ की व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसके तहत श्रमिक की हाजिरी लगते ही वह केंद्रीय सर्वर में अपलोड हो जाएगी। इससे कच्चे और पक्के कामों में फर्जीवाड़ा रोकना आसान होगा। काम शुरू होने से पहले, काम के दौरान और पूरा होने के बाद की तस्वीरें अक्षांश और देशांतर के साथ अपलोड की जाएंगी, और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा इन तस्वीरों का मिलान होने के बाद ही भुगतान किया जाएगा। मजदूरों की बॉयोमेट्रिक और रेटिना हाजिरी भी अनिवार्य होगी।
नई योजना में कामों की निगरानी अब अधिकारी-आधारित न होकर एआई के माध्यम से होगी। प्रत्येक परियोजना स्थल के बाहर कार्य प्रभारियों को एक क्यूआर कोड वाला स्मार्ट बोर्ड लगवाना होगा। इस क्यूआर कोड को स्कैन करके कोई भी व्यक्ति यह जान सकेगा कि संबंधित काम में कितना पैसा खर्च हुआ, कितने मजदूर लगे, सामग्री कहां से खरीदी गई, काम कब शुरू हुआ और कब तक खत्म होगा। इस तकनीक के हस्तक्षेप से कामों में गोलमोल की गुंजाइश खत्म हो जाएगी और पूरी जानकारी तत्काल उपलब्ध होगी, जिससे किसी भी काम को छुपाया नहीं जा सकेगा। यह व्यवस्था सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।
