राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे की जांच: एसआईटी की पड़ताल में सब कुछ आएगा
राम मंदिर में चढ़ावे की हेराफेरी की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी का दायित्व अब और बढ़ गया है। एसआईटी ने जांच के दूसरे चरण में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वर्ष 2020 में हुई स्थापना से लेकर अब तक की पूरी वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को पड़ताल के दायरे में ले लिया है।
इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनता द्वारा मंदिर निर्माण के लिए दिए गए दान का सही और पारदर्शी तरीके से उपयोग हो। एसआईटी अब देश-विदेश से मिले तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक के दान, उस रकम के उपयोग, बैंकिंग लेनदेन, निर्माण कार्यों पर हुए खर्च, भूमि खरीद, सोने-चांदी के चढ़ावे, लेखा प्रणाली, आंतरिक वित्तीय नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था की गहन जांच कर रही है।
एसआईटी ने अयोध्या में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, मुख्य प्रबंधक गोपाल राव, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि और ट्रस्टी दिनेंद्र दास से पूछताछ कर दान प्रबंधन, जिम्मेदारियों के बंटवारे और निगरानी व्यवस्था से जुड़े बिंदुओं की जानकारी ली। एसआईटी स्टेट बैंक की चढ़ावे की रकम के प्रबंधन, नकदी गिनने की जिम्मेदारी संभाल रही आउटसोर्स एजेंसी की भूमिका, भर्ती प्रक्रिया, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही के भी सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
अधिकारियों के बयानों का मिलान कर यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं किसी स्तर पर निगरानी में चूक या संस्थागत खामी तो नहीं रही। एसआईटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चढ़ावे की रकम में हेराफेरी कब से और किस-किस स्तर से हो रही थी।
