लखनऊ से विदेशियों की अरबों की साइबर ठगी का खुलासा, 119 गिरफ्तार
लखनऊ में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसमें कॉल सेंटर की आड़ में विदेशियों से अरबों की ठगी की जा रही थी। पुलिस ने इस मामले में दो प्रोग्राम मैनेजर सहित 119 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अमेरिका, कनाडा और अन्य देशों के नागरिकों को निशाना बना रहा था।
साइबर ठगी का यह रैकेट विभूतिखंड इलाके की समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर स्थित दो कार्यालयों से करीब डेढ़ साल से चल रहा था। यहां काम करने वाले युवक-युवतियां फर्राटेदार अंग्रेजी का इस्तेमाल कर विदेशी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट, ब्लैकमेलिंग, ई-वॉलेट की समस्याओं में मदद का झांसा देकर या खरीदारी का प्रलोभन देकर ठगी करते थे। गिरोह मुख्य रूप से डॉलर ऐप और आईबीम सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहा था।
पुलिस ने मंगलवार देर रात छापा मारकर दोनों कॉल सेंटरों को सील कर दिया। ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार सहित 119 लोगों को पकड़ा गया। पकड़े गए लोगों में गुजरात, महाराष्ट्र, असम और अन्य राज्यों की 27 महिलाएं और 92 पुरुष शामिल हैं। पुलिस की टीमें इनसे पूछताछ कर गिरोह के विस्तृत नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।
इन कॉल सेंटरों में 30 से 40 हजार रुपये या उससे अधिक मासिक वेतन पर पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरी पर रखा जाता था। जो कर्मचारी अधिक लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे, उन्हें संचालक 10 फीसदी इंसेंटिव भी देते थे, जिससे उनकी कमाई डेढ़ लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच जाती थी। ऑपरेशन मैनेजर कर्मचारियों को विदेशी नागरिकों से अंग्रेजी में बात करने और उन्हें झांसे में लेने के लिए पूरी स्क्रिप्ट रटवाते थे।
पुलिस के अनुसार, गिरोह आईबीम सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल इंटरनेट कॉलिंग के लिए करता था। वे पहले ऑनलाइन कंपनियों से विदेशियों का डेटा जुटाते थे। फिर डेस्क पर बैठे कर्मचारी खुद को अमेजन जैसी कंपनियों का कर्मचारी बताकर ई-वॉलेट में समस्या होने का हवाला देते थे। वे पीड़ितों को किसी अन्य वॉलेट में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहकर या ओटीपी लेकर उनके खाते खाली कर देते थे।
इसके अलावा, गिरोह एसएमएस भेजकर लोगों को गिफ्ट के बहाने टोल फ्री नंबर पर कॉल करने के लिए उकसाता था। जब पीड़ित कॉल करते थे, तो उनसे ठगी की जाती थी। गिरोह विदेशी नागरिकों को धमकाकर डिजिटल अरेस्ट के फर्जी वारंट ईमेल या सॉफ्टवेयर के माध्यम से भेजकर डराता था और बदनामी का डर दिखाकर गिफ्ट कार्ड, डिजिटल कूपन और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पैसे ऐंठता था।
शेयर बाजार में निवेश के नाम पर भी डॉलर ऐप के जरिए लोगों को ठगा जाता था। सॉफ्टवेयर के माध्यम से पीड़ितों को निवेश की राशि में तेजी से वृद्धि दिखाकर विश्वास दिलाया जाता था, जिसके बाद वे और अधिक निवेश करते थे। फिर उन्हें ब्लॉक कर दिया जाता था या निकासी के लिए टैक्स के नाम पर और पैसे ठग लिए जाते थे।
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 100 लैपटॉप, 178 मोबाइल फोन, कॉलिंग डेटा, हजारों बैंक ई-वॉलेट डिटेल और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने बताया कि गिरोह मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाता था और डिजिटल अरेस्ट, ब्लैकमेलिंग व ई-वॉलेट खराब होने के डर से ठगी करता था।
