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करोहानाथ धाम: 700 साल पुराना शिव मंदिर, जहां बुद्ध और अशोक की विरासत से जुड़ा है इतिहास

By Jun 15, 2026

गोंडा जिले की मनकापुर तहसील में स्थित करोहानाथ धाम एक अनूठा ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। यह रहस्यमयी शिव मंदिर सम्राट अशोक के स्तंभ के खंडहरों पर खड़ा है और इसकी आस्था 700 साल से भी अधिक पुरानी है। यह वह पावन भूमि है जहां इतिहास और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

करौहामान गांव के पास स्थित यह तीर्थस्थल बौद्ध धर्म की स्मृतियों, सम्राट अशोक की विरासत और गहड़वाल वंश की आस्था का प्रतीक है। यहां हर सोमवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जो इसकी जीवंत आस्था को दर्शाती है।

ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार, यह भूमि बौद्ध साहित्य में तोरणवस्तु के नाम से वर्णित है और श्रावस्ती से साकेत जाने वाले मार्ग पर एक महत्वपूर्ण विश्राम स्थल थी। कहा जाता है कि स्वयं भगवान बुद्ध ने यहां धर्मोपदेश दिया था और रानी खेमा ने भी यहां विहार किया था। इस स्थल का संबंध डाकू अंगुलीमाल के उद्धार की कथा से भी जोड़ा जाता है, जो इसे करुणा, ज्ञान और मुक्ति का साक्षी बनाता है।

सम्राट अशोक ने इस स्थान के महत्व को पहचानते हुए यहां एक भव्य स्तूप, विहार और स्तंभ का निर्माण कराया था। समय के साथ स्तंभ खंडहर में बदल गया, लेकिन गहड़वाल वंश के राजा गोविन्द चन्द्र देव ने उसी स्तंभ के भग्नावशेष को शिवलिंग के रूप में प्रतिष्ठित कर शिव मंदिर की स्थापना की। इस प्रकार, एक ही पत्थर में बौद्ध और शैव परंपरा का यह संगम इसे विश्व में अद्वितीय बनाता है।

सदियों से विभिन्न राजघरानों के संरक्षण में रहे इस मंदिर का 1904 में मनकापुर के राजा रघुराज प्रताप सिंह ने संगमरमर से पुनर्निर्माण कराया। 2012 में राजा आनन्द सिंह ने इसका जीर्णोद्धार और विस्तार किया। पर्यटन विभाग के सहयोग से भी इसका सौंदर्यीकरण हुआ है। वर्तमान में यह मनकापुर राज घराने के संरक्षण में है और परिसर में स्वच्छता व प्रकाश की उत्तम व्यवस्था है।

यह मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। हर सोमवार को जलाभिषेक और पूजन-अर्चन के लिए भक्तों की भीड़ लगती है। मलमास, कजरी तीज और महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेले जैसा माहौल होता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं और निःसंतान महिलाओं को संतान सुख मिलता है। यही कारण है कि गोंडा, आसपास के जिलों और नेपाल से भी श्रद्धालु यहां आते हैं। करोहानाथ धाम आत्मा को सुकून देने वाला एक अनुभव है, जहां हर पत्थर एक युग की कहानी कहता है।

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