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यूपी रेरा का AI पोर्टल 2.0: बिल्डरों की असलियत मिनटों में जानें, खरीदारों को मिलेगी बड़ी राहत

By May 6, 2026

उत्तर प्रदेश में घर या प्लॉट खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) जल्द ही अपना एडवांस पोर्टल 2.0 लॉन्च करने की तैयारी में है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की सुविधा से लैस होगा। इस नई व्यवस्था के लागू होने से खरीदार कुछ ही मिनटों में यह पता लगा सकेंगे कि कौन सा बिल्डर भरोसेमंद है और कौन धोखेबाज साबित हो सकता है।

एआई के माध्यम से बिल्डरों की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। नए पोर्टल 2.0 के शुरू होने के बाद कोई भी व्यक्ति सीधे एआई से यह सवाल पूछ सकेगा कि किस बिल्डर के खिलाफ कितनी शिकायतें दर्ज हैं, कौन डिफॉल्टर है, किसने ग्राहकों को ठगा है और कौन समय पर मकान देने में सक्षम है। एआई डेटा के आधार पर तुरंत सवालों के जवाब देगा और हर बिल्डर के खिलाफ शिकायतों का प्रतिशत भी बताएगा। इससे रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों को ठगी का शिकार होने से बचाया जा सकेगा।

रेरा के अध्यक्ष संजय भूस रेड्डी ने बताया कि संस्था के गठन के 9 साल पूरे हो चुके हैं और अब यह अपने 10वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि अब हर साल 1 मई को ‘रेरा दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।

रेरा चेयरमैन ने वर्ष 2024 में 69,365 और वर्ष 2025 में 84,976 आवासीय इकाइयों के प्रस्तावित निर्माण का उल्लेख किया, जो राज्य में बढ़ती मांग और मजबूत निवेश भावना को दर्शाता है। वर्ष 2025 में प्रस्तावित इकाइयों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 22.5% अधिक रही, जो घर खरीदारों के लिए उपलब्ध इन्वेंट्री में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत है। वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में 33,206 इकाइयों के निर्माण का प्रस्ताव है।

रियल एस्टेट सेक्टर में खरीदारों को बड़ी राहत देते हुए, रेरा ने संपत्ति ट्रांसफर के नियमों में भी बदलाव किया है। यदि किसी खरीदार की संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले मृत्यु हो जाती है, तो संपत्ति को वारिस के नाम करने के लिए बिल्डर को केवल 1000 रुपये का शुल्क देना होगा। पहले इसके लिए 400 से 500 रुपये प्रति वर्ग फुट तक शुल्क वसूला जाता था। यदि संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर की जाती है, तो अधिकतम 5000 रुपये का शुल्क लगेगा। यह बदलाव इसलिए किया गया है क्योंकि खरीदार पहले ही राशि का भुगतान कर चुका होता है।

रेरा ने नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की है। अध्यक्ष संजय भूस रेड्डी के अनुसार, 30 बिल्डरों के 72 प्रोजेक्ट ऐसे पाए गए जिन्होंने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया था और जरूरी जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई थी। इन सभी को डिफॉल्टर घोषित करते हुए कुल 47.52 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

यूपी रेरा चेयरमैन के अनुसार, वर्ष 2023 में 197 नए प्रोजेक्ट पंजीकृत हुए, वर्ष 2024 में 259 और वर्ष 2025 में 308 प्रोजेक्ट पंजीकृत हुए। इस प्रकार, वर्ष 2025 में यूपी रेरा में पंजीकृत परियोजनाओं की संख्या में 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह गति वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में और तेज हुई है, जिसमें 106 नए प्रोजेक्ट पंजीकृत हुए, जो वर्ष 2025 की समान अवधि की तुलना में 22 अधिक हैं, जो 19% की अच्छी वृद्धि दर्शाता है।

आंकड़ों के अनुसार, रेरा ने 6,252 रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किए, जिसके माध्यम से प्रमोटरों से ₹1,581 करोड़ की राशि वसूलकर खरीदारों को लौटाई गई। समझौते के माध्यम से 1,777 रिकवरी सर्टिफिकेट के विरुद्ध ₹545 करोड़ ग्राहकों को दिलाए गए। कुल मिलाकर, 8,029 आवंटियों को ₹2,126 करोड़ की लंबित राशि प्राप्त हुई है। रेरा पीठों के समक्ष 3,095 मामलों में ₹1,883 करोड़ का समाधान हुआ।

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