87 पुरानी एसी जनरथ बसें बढ़ाएंगी यात्रियों की मुसीबत, 18 शहरों के रूट पर ब्रेकडाउन का खतरा
परिवहन निगम की 87 एसी जनरथ बसें, जो 2014 में खरीदी गई थीं, अब अपने जीवनकाल के अंत में हैं। 12 लाख किलोमीटर से अधिक की यात्रा पूरी कर चुकी ये बसें नीलामी के दायरे में आ गई हैं। इन बसों के कलपुर्जे घिस चुके हैं, इंजन में आए दिन खराबी आ रही है, कूलेंट का रिसाव हो रहा है और एसी सिस्टम भी फेल हो रहे हैं। इस गर्मी में, इन पुरानी बसों से यात्रा करना यात्रियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
मरम्मत के अभाव में, इन 87 बसों में से लगभग 10 से 12 बसें प्रतिदिन डिपो में खड़ी रहती हैं। जो बसें चल भी रही हैं, उनमें से औसतन पांच से सात बसें रोजाना बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में, परिवहन निगम की इन बसों से सफर करना यात्रियों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। इन बसों की मरम्मत पर खर्च भी काफी बढ़ गया है, जिससे संबंधित कंपनी के लिए भी यह एक सिरदर्द बन गया है।
लखनऊ क्षेत्र के अवध डिपो में स्थित ये 87 एसी जनरथ बसें प्रदेश के 18 शहरों के बीच चलाई जा रही हैं। आए दिन दो-चार बसें बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं। इनमें से 66 बसें अपने निर्धारित जीवनकाल के करीब हैं, और 26 बसें मई माह में नीलामी के लिए निर्धारित हैं।
यह स्थिति यात्रियों के लिए चिंताजनक है, क्योंकि रोजाना 5000 से अधिक यात्री इन बसों से सफर करते हैं। 18 मार्गों पर औसतन 6 से 8 बसें प्रतिदिन ब्रेकडाउन में दर्ज की जा रही हैं, जिससे यात्री बेबस नजर आ रहे हैं।
अवध डिपो के एआरएम सत्यनारायण चौधरी ने बताया कि मरम्मत के अभाव में खड़ी एसी जनरथ बसों की जिम्मेदारी निजी कंपनी की है। उनकी लापरवाही के कारण यात्रियों को एसी बसों की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कंपनी की लापरवाही पर हर माह लाखों रुपये की कटौती के बावजूद सुधार नहीं हो रहा है।
