स्कूली वाहनों पर सख्ती: ऑटो चालकों की हड़ताल, अभिभावक बोले – बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
अलीगढ़ में स्कूली वाहनों के अधूरे मानकों पर कार्रवाई शुरू होते ही ऑटो चालकों ने हड़ताल कर दी, जिससे बच्चों को स्कूल ले जाने और लाने में अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा से समझौता न करने की बात कहते हुए विभाग की कार्रवाई का पुरजोर समर्थन किया है।
यह अभियान हाल ही में हुई दो दर्दनाक घटनाओं के बाद चलाया जा रहा है। 1 मार्च को अलीगढ़ में 6 वर्षीय छात्रा अनन्या की स्कूली बस की टूटी सतह से गिरने से मौत हो गई थी। इसी तरह की घटना 11 मार्च को आगरा में हुई, जहां 9 वर्षीय नैना की स्कूली बस की टूटी सतह से गिरने से मृत्यु हो गई थी। इन घटनाओं ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था।
इन घटनाओं के मद्देनजर, शासन ने 1 अप्रैल से स्कूली वाहनों के विरुद्ध अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। आरटीओ दीपक कुमार शाह ने पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए पत्राचार किया है। अभियान की सूचना फैलते ही बुधवार सुबह ऑटो चालकों ने हड़ताल कर दी, जिससे कई बच्चे स्कूल नहीं पहुंच सके। अभिभावकों को स्वयं बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने के लिए दौड़ लगानी पड़ी।
अभिभावकों का समर्थन
स्कूल पहुंचे अभिभावकों ने ऑटो चालकों की मनमानी को गलत ठहराया। उनका कहना था कि जब वाहन के मानक पूरे नहीं हैं तो कार्रवाई होने पर हड़ताल करना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और वाहनों में सभी मानक पूरे होने चाहिए।
अनिवार्य मानक
आरटीओ प्रशासन दीपक कुमार शाह के अनुसार, स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए वाहनों की आयु सीमा 15 साल निर्धारित की गई है। इसके अलावा, वैध पंजीकरण, फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र, जीपीएस, सीसीटीवी, पीले रंग का बॉडी, स्कूल का नाम, प्रधानाचार्य का नंबर, क्रॉस शीशे, दो अग्निशमन यंत्र, 40 किमी प्रति घंटा की गति सीमा और पांच साल के अनुभव वाले चालक अनिवार्य हैं।
कार्रवाई जारी रहेगी
आरटीओ प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की जान से बढ़कर कुछ भी नहीं है और किसी भी अधूरे मानक वाले वाहन को चलने नहीं दिया जाएगा। चाहे कोई भी हड़ताल करे, विभाग की कार्रवाई जारी रहेगी।
