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यूपी में प्रीपेड मीटर की टेंशन खत्म, नियामक आयोग ने दी बड़ी राहत

By May 30, 2026

उत्तर प्रदेश में प्रीपेड मीटरों को लेकर लंबे समय से चल रहा विरोध और उपभोक्ताओं की आशंकाएं अब समाप्त हो गई हैं। नियामक आयोग ने एक स्पष्ट आदेश जारी किया है कि विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) में बदलाव हुए बिना प्रदेश में प्रीपेड मीटर व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जा सकेगा। इस आदेश से यह अटकलें पूरी तरह खारिज हो गई हैं कि इसे भविष्य में कभी भी अनिवार्य किया जा सकता है।

नियामक आयोग के शुक्रवार को जारी आदेश के अनुसार, उपभोक्ताओं के पास अब बिजली कनेक्शन के लिए प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों में से किसी एक को चुनने का अधिकार होगा। बिजली कंपनियों को विद्युत अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था पुराने और नए दोनों तरह के विद्युत कनेक्शनों पर समान रूप से लागू होगी। आयोग ने यह निर्णय राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा दायर एक लोक महत्व प्रस्ताव पर सुनवाई के बाद लिया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश ऐसा पहला राज्य बन गया है जहाँ नियामक आयोग ने धारा 47(5) पर विशेष आदेश जारी किया है, जिससे राज्य सरकार या पावर कॉरपोरेशन द्वारा इसमें एकतरफा बदलाव की गुंजाइश समाप्त हो गई है। इस फैसले के बाद पावर कॉरपोरेशन को अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर में भी आवश्यक संशोधन करने होंगे।

इस बीच, बहुमंजिला इमारतों में प्रीपेड मीटर और संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए नियामक आयोग में एक नई याचिका दायर की गई है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने 2018 के एक आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसके तहत बहुमंजिला इमारतों में बिजली कनेक्शन केवल प्रीपेड मोड में ही दिए जा रहे थे। याचिका में बिल्डरों द्वारा मनमानी बिजली दरों की वसूली और मेंटेनेंस शुल्क की प्रीपेड मीटर से कटौती की शिकायतों का भी उल्लेख है। उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने एक अप्रैल 2026 से पूरे देश में प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। प्रदेश में लगभग 20-25 लाख उपभोक्ता प्रभावित हैं, जिनके पुराने प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में नहीं बदला जा रहा है। याचिका में बहुमंजिला इमारतों में प्रीपेड व्यवस्था समाप्त करने, साझा क्षेत्रों में बिजली खर्च का ब्योरा उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने और बिल्डरों द्वारा बिजली दरें तय करने पर रोक लगाने की मांग की गई है।

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