बिजली कर्मियों का उत्पीड़न के खिलाफ प्रदर्शन, 11 अप्रैल तक मांगे पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेश भर के बिजली कर्मियों ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि प्रबंधन को नोटिस भेजकर मार्च 2023 की हड़ताल के बाद संविदा कर्मियों और अभियंताओं पर की गई सभी दंडात्मक कार्यवाहियों, जैसे निलंबन, एफआईआर और सेवा समाप्ति को तत्काल वापस लेने की मांग की है। कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध, फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन रोकने, और बिना जांच सेवा समाप्ति जैसे नए नियमों का कड़ा विरोध किया है। साथ ही, आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाने और प्रस्तावित बड़े पैमाने पर स्थानांतरणों को रोकने की मांग की गई है।
यह विरोध प्रदर्शन राज्य के सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों और कार्यस्थल की स्थितियों को लेकर चिंताएं उजागर करता है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को नजरअंदाज करने से बिजली आपूर्ति की निर्बाधता पर भी असर पड़ सकता है।
समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि 11 अप्रैल 2026 तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो प्रदेशव्यापी बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारी निर्बाध आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन दमनात्मक नीतियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। 01 अप्रैल से किसी भी नए निलंबन पर सामूहिक सत्याग्रह की घोषणा की गई है।
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