UP Human Trafficking: DGP ने दिए कड़े निर्देश, इंटेलिजेंस नेटवर्क मजबूत करने पर जोर
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने राज्य में मानव तस्करी रोकने के लिए इंटेलिजेंस नेटवर्क को और मजबूत करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी आधुनिक दासता का सबसे क्रूर रूप है, जो न केवल एक संगठित अपराध है बल्कि मानवाधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन है। डीजीपी ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक कार्यशाला में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थानों को संभावित हॉटस्पॉट चिन्हित कर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए।
डीजीपी ने नेपाल सीमा पर सुरक्षा बल (एसएसबी) के साथ मिलकर अभियान चलाने और रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों पर विशेष निगरानी रखने को कहा है। यह कदम मानव तस्करी के मामलों को जड़ से खत्म करने के लिए उठाया गया है। कार्यशाला में महिला व बाल सुरक्षा संगठन की ओर से 350 से अधिक पुलिसकर्मियों को मानव तस्करी से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षित किया गया। इसमें सभी जिलों के AHTU नोडल अधिकारी, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के समन्वयक, जीआरपी और आरपीएफ के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 से 2025 के बीच मानव तस्करी के 1,010 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 832 मामलों में पुलिस आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इसके अलावा, विदेश में रोजगार के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले अवैध एजेंटों के खिलाफ प्रवासन अधिनियम के तहत 342 मामले दर्ज किए गए हैं। डीजीपी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले पांच विवेचकों और पांच एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना प्रभारियों को सम्मानित भी किया।
