UP में मनोनीत पार्षदों की घोषणा, BJP ने साधा जातीय समीकरण | UP politics news
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के नगर निकायों में मनोनीत पार्षदों की घोषणा कर दी है। यह फैसला आगामी चुनावों से पहले भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य सामाजिक समीकरणों को साधकर अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करना है। नगर निगमों में 10-10, नगर पालिका परिषदों में पांच-पांच और नगर पंचायतों में तीन-तीन सदस्यों को नामित किया गया है।
मनोनीत पार्षदों के चयन में सामाजिक विविधता का विशेष ध्यान रखा गया है। आगरा नगर निगम में पार्षदों की संख्या 100 से बढ़कर 110 हो गई है, जहां अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के कार्यकर्ताओं को भी स्थान दिया गया है। वहीं, लखनऊ में भी विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों को मौका मिला है।
वाराणसी में नगर निगम सदन के गठन के तीन साल बाद मनोनीत पार्षदों के नाम तय किए गए हैं। सूची में शामिल कई नाम भाजपा के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के हैं, जिनमें आरएसएस स्वयंसेवक, किसान मोर्चा के पदाधिकारी और मीडिया विभाग के सह-संयोजक शामिल हैं। यह कदम पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत करने के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, मनोनीत पार्षदों की सूची जारी होने के बाद वाराणसी में भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष भी देखने को मिला है। शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र से एक भी नाम शामिल न होने पर कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि इस चयन प्रक्रिया ने संगठन के भीतर ही कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे क्षेत्रीय वितरण को लेकर असंतुलन की स्थिति बनी है।
