AI security को लेकर चेतावनी: डीपफेक और AI मैलवेयर से बड़ा खतरा, ‘जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर’ जरूरी
आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर में आयोजित एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा के बढ़ते खतरों पर गंभीर चर्चा हुई। विषय विशेषज्ञ डॉ. अमित सिंघल ने चेतावनी दी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उदय से साइबर अपराध की प्रकृति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि डेटा सुरक्षा अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय बन चुका है।
डॉ. सिंघल ने बताया कि AI जहां एक ओर सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने में मदद कर रहा है, वहीं दूसरी ओर डीपफेक, AI मैलवेयर और AI फिसिंग जैसे नए खतरे भी पैदा हो गए हैं। इन खतरों ने साइबर अपराधियों के लिए पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी करना आसान बना दिया है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक सुरक्षा मॉडल अब इन जटिल चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं हैं।
इन खतरों से निपटने के लिए डॉ. सिंघल ने ‘जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर’ को अपनाने पर जोर दिया। इस मॉडल में हर डिवाइस और उपयोगकर्ता का निरंतर सत्यापन अनिवार्य होता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता और नैतिक तकनीकी व्यवहार ही इन खतरों से बचने का सर्वोत्तम मार्ग है। यह कार्यक्रम शिक्षकों, कर्मचारियों और शोधार्थियों को AI के दौर की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
