National Medical Commission Survey: 30% मेडिकल छात्र डिप्रेशन में, विशेषज्ञ बोले- तनाव अब बीमारी है
देश के मेडिकल छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के एक सर्वे के अनुसार, 27.8% स्नातक (UG) और 31.3% परास्नातक (PG) छात्र डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। यह खुलासा एम्स नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के हेड डॉ. नंद कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और करियर के दबाव के कारण इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में आत्महत्या की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
डॉ. नंद कुमार ने कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में आयोजित एक व्याख्यान में ये आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि पहले तनाव को जीवन की चुनौतियों के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब यह एक बीमारी बन चुका है। मानसिक स्वास्थ्य केवल मस्तिष्क या भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शारीरिक स्वास्थ्य, व्यक्तिगत अनुभवों, सामाजिक संबंधों और जीवन परिस्थितियों से भी गहराई से जुड़ा होता है।
व्याख्यान के दौरान डॉ. नंद कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य के जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों के समन्वित प्रभाव को समझाया। उन्होंने तनाव प्रबंधन के लिए सकारात्मक सोच, आत्म-जागरूकता, सामाजिक सहयोग और संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन उपायों से छात्रों को काफी लाभ मिल सकता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि छात्रों में डिप्रेशन प्रबंधन की शक्ति विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ मानसिक संतुलन और भावनात्मक सुदृढ़ता को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
