बेहमई रिपोर्टिंग चौकी: नाम की चौकी, एक सिपाही के सहारे संचालित, जीडी भी राजपुर थाने में
कानपुर देहात के बेहमई में बनी रिपोर्टिंग चौकी आज अपनी उपयोगिता खो चुकी है। फूलन देवी द्वारा 14 फरवरी 1981 को किए गए सामूहिक नरसंहार के बाद ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए इस चौकी की स्थापना की गई थी। हालांकि, विडंबना यह है कि चौकी बनने से लेकर आज तक एक भी मुकदमा यहां पंजीकृत नहीं हुआ है।
वर्तमान में चौकी इंचार्ज नीरज कुमार अवकाश पर हैं और एक सिपाही योगेन्द्र कुमार को राजपुर थाने से अटैच किया गया है। केवल एक सिपाही संतोष कुमार के सहारे चौकी का संचालन हो रहा है। पहले यहां जीडी (जनरल डायरी) भी थी, लेकिन अब वह भी राजपुर थाने भेज दी गई है। मुंशी की तैनाती भी नहीं है। शासन द्वारा रिपोर्टिंग चौकी के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद इसका कोई उपयोग नहीं रह गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि चौकी केवल पुलिस के आरामगाह बनकर रह गई है। किसी भी विवाद की स्थिति में उन्हें राजपुर थाने जाना पड़ता है, जहां मुकदमा पंजीकृत होता है। बेहमई चौकी सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गई है, जिससे सुरक्षा की उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीणों को निराशा हाथ लगी है। इस स्थिति से स्थानीय लोगों में काफी असंतोष है।
