अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रम्प के इमरजेंसी US tariffs पर रोक, कंपनियों को राहत
अमेरिकी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ की वसूली आज से बंद कर दी है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने तीन दिन पहले इन टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था, जिसके बाद यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस फैसले से वैश्विक व्यापार पर गहरा असर पड़ेगा और कई देशों की कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने इन टैरिफ का भुगतान किया था।
अमेरिकी कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने एक बयान में पुष्टि की है कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए इन टैरिफ को अब लागू नहीं किया जाएगा। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस फैसले के कारण अमेरिकी सरकार को 175 अरब डॉलर (लगभग 15.75 लाख करोड़ रुपए) से अधिक की राशि वापस करनी पड़ सकती है। इन टैरिफ से अमेरिका को प्रतिदिन 50 करोड़ डॉलर (लगभग 4,500 करोड़ रुपए) से अधिक की कमाई हो रही थी। अब कंपनियां रिफंड की मांग कर सकती हैं, जिससे आयातकों को बड़ी राहत मिलेगी।
ट्रम्प ने जताई नाराजगी, लेकिन दावा किया बढ़ी शक्ति
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि कई देशों ने व्यापार में बरसों तक अमेरिका को नुकसान पहुंचाया है। ट्रम्प ने उन देशों को भी चेतावनी दी है जो ट्रेड डील के नाम पर अमेरिका के साथ “गेम” खेलने की कोशिश करेंगे, उन्हें और ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।
हालांकि, ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने अनजाने में उन्हें टैरिफ लगाने के और अधिक अधिकार दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला स्पष्ट करता है कि वह अन्य कानूनों के तहत अपनी टैरिफ लगाने की शक्ति का और अधिक सख्ती से उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने लाइसेंस जैसे तरीकों का उपयोग करके देशों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की भी बात कही।
कुछ टैरिफ अभी भी रहेंगे लागू
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केवल IEEPA कानून के तहत लगाए गए टैरिफ पर लागू होता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ‘सेक्शन 232’ और अनुचित व्यापार मामलों के ‘सेक्शन 301’ के तहत लगाए गए टैरिफ जारी रहेंगे। इन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा। CBP ने व्यापार से जुड़े लोगों को आगे की जानकारी आधिकारिक संदेशों के जरिए देने की बात कही है। सेक्शन 232, 1962 के कानून का हिस्सा है, जो राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे की स्थिति में आयात पर टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
