आगरा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक से 20 लाख की ठगी, दो गिरफ्तार | Agra cyber fraud
आगरा के अकराबाद में एक सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 20.82 लाख रुपये की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। इस धोखाधड़ी के संबंध में साइबर क्राइम पुलिस ने उत्तराखंड से दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों की पहचान अनूप सिंह और धीरज के रूप में हुई है, जो साइबर ठगों को कमीशन पर बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। पुलिस ने इनके पास से चार बैंक पासबुक, पांच चेकबुक, दो पैन कार्ड, पांच डेबिट कार्ड, दो मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड बरामद किया है।
यह घटना तब सामने आई जब अकराबाद निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 7 जनवरी को उन्हें एक कॉल आया, जिसमें फोन करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उनके बैंक खाते मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जांच के दायरे में हैं। शातिर ने उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की धमकी दी और वारंट जारी होने की बात कही। इसके बाद उन्हें कोर्ट आदेश, ईडी नोटिस और सीबीआई नोटिस भेजने का डर दिखाया गया। लगातार वीडियो कॉल के जरिए डरा-धमकाकर 13 से 28 जनवरी के बीच उनसे 20.82 लाख रुपये ठग लिए गए।
सीओ साइबर क्राइम सर्जना सिंह के नेतृत्व में इंस्पेक्टर महेश कुमार त्यागी और इंस्पेक्टर उदयभान सिंह की टीम ने जांच शुरू की। जांच में पता चला कि ठगी गई रकम में से पांच लाख रुपये उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल निवासी अनूप सिंह के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस ने अनूप को देहरादून से गिरफ्तार किया। पूछताछ में अनूप ने बताया कि रुद्रपुर निवासी धीरज ने उसे कमीशन पर बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए कहा था। धीरज एक फूड डिलीवरी कंपनी में काम करता है, जबकि अनूप मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता है। दोनों ने बताया कि खाता उपलब्ध कराने के बदले उन्हें ढाई लाख रुपये मिले थे। इस प्रकार के ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड से आम जनता को सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और मुख्य सरगना अंकित की तलाश में जुटी है।
