यूपी बजट सत्र: महंगाई पर सपा विधायक ने सुनाई कविता, CM योगी ने दिया जवाब | UP Budget Session
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज आखिरी दिन था, जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट पर अपनी सरकार का पक्ष रखा। सत्र के दौरान महंगाई, बेरोजगारी, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मानदेय और जाति प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। यह सत्र प्रदेश के नागरिकों से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा का गवाह बना।
सदन में महंगाई के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक आरके वर्मा ने एक कविता के माध्यम से सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, ‘तेल की बोतल पूछ रही है ये, पहले तुम ही खरीदते तो मुझे…आज क्यों सोच रहे हो।’ उन्होंने आलू किसानों की समस्याओं को भी उठाया। इसके जवाब में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि सरकार ने नौ वर्षों में कोई नया टैक्स नहीं लगाया है और बोतल के दाम बढ़ने पर विपक्ष के तंज का जवाब दिया।
बेरोजगारी के मुद्दे पर सपा विधायक संग्राम सिंह ने सरकार द्वारा लगाए जा रहे रोजगार मेलों पर सवाल उठाए और आंकड़ों के साथ दावा किया कि युवा नौकरी के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं। श्रम मंत्री अनिल राजभर ने इसका खंडन करते हुए कहा कि पलायन शब्द अब यूपी से बाहर हो गया है और सरकार भत्ते की बजाय नौकरी और रोजगार देने पर विश्वास करती है। उन्होंने पिछली सपा सरकारों के बेरोजगारी भत्ते के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मानदेय बढ़ाने की मांग सपा विधायक रागिनी सोनकर ने उठाई, जिस पर मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि निविदा में कार्य अवधि निर्धारित होती है और कर्मी नहीं बदले जाते हैं। वहीं, जाति प्रमाण पत्र बनाने में देरी के मुद्दे पर समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि राजस्व परिषद इसके लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है ताकि गोंड और खरवार जैसी जातियों के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र बनाने में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके।
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने रमजान पर मस्जिदों से लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति देने की सपा की मांग को खारिज कर दिया, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया। जलशक्ति विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सपा विधायक शिवपाल यादव ने मंत्री स्वतंत्र देव से अधिकारियों पर सख्ती बरतने की अपील की। सत्र के दौरान सपा सदस्यों के आचरण पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कई बार नाराजगी व्यक्त की, जिसके बाद सपा सदस्य अपनी सीटों पर बैठे। इन सभी बहसों और चर्चाओं का सीधा असर प्रदेश की जनता पर पड़ता है, क्योंकि ये मुद्दे उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी और भविष्य से जुड़े हैं।
