अलीगढ़ में 10 हजार से अधिक दाखिल-खारिज मामले लंबित, Aligarh property news में देरी से लोग परेशान
अलीगढ़ जिले में संपत्ति के दाखिल-खारिज (स्वामित्व परिवर्तन) की प्रक्रिया में भारी देरी से आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व रिकॉर्ड में जमीनों के स्वामित्व परिवर्तन के 10 हजार से अधिक मामले लंबित पड़े हैं, जिनमें से कई तो पांच साल से भी ज्यादा पुराने हैं। शासन ने इस प्रक्रिया के लिए अधिकतम 45 दिन की समय सीमा तय की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह नियम अक्सर टूटता दिख रहा है।
दाखिल-खारिज में देरी से आम जनता पर असर
दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में महीनों की देरी के चलते संपत्ति के कई सौदे अटक गए हैं। इसके कारण संपत्ति से जुड़े विवादों में भी बढ़ोतरी हो रही है। खासकर मृत्यु के बाद नाम हटाने और जोड़ने के लिए जरूरी नामांतरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी लंबित हैं, जिससे आवेदक महीनों से इंतजार कर रहे हैं। कई आवेदकों के तो बैंकों में लोन के मामले भी दाखिल-खारिज के चक्कर में अटके हुए हैं, जिससे उनकी वित्तीय योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
लंबित मामलों की स्थिति
जिले की विभिन्न तहसीलों में लंबित मामलों की संख्या चिंताजनक है। कोल तहसील में सर्वाधिक 4774 मामले, खैर में 2223 और अतरौली में 1452 मामले लंबित हैं। कुल 10,128 मामलों में से 6078 मामले 45 दिन से कम अवधि के हैं, लेकिन 1669 मामले तीन माह से कम, 667 मामले छह माह से कम, 743 मामले एक वर्ष से कम, 785 मामले तीन वर्ष से कम, 167 मामले पांच वर्ष से कम और 19 मामले पांच वर्ष से अधिक अवधि से लंबित हैं।
देरी के मुख्य कारण
राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दाखिल-खारिज के मामलों में आपत्तियां अक्सर सिरदर्द साबित होती हैं। आपत्ति लगने पर मामला राजस्व न्यायालयों में चला जाता है और सुनवाई की तारीखें लंबी खिंचती रहती हैं। कभी आपत्ति लगाने वाला पक्ष उपस्थित नहीं होता तो कभी अन्य तकनीकी पेच फंस जाते हैं। इसके अलावा, संयुक्त निरीक्षण का अभाव और लेखपालों व राजस्व निरीक्षकों जैसे कर्मचारियों की कमी भी इस प्रक्रिया को धीमा कर रही है। इन दिनों एसआईआर (सर्वे ऑफ इंडिया रिकॉर्ड) का कार्य भी चल रहा है, जिससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ है।
प्रशासन का रुख
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जिन मामलों में कोई आपत्ति नहीं होती, उनका निस्तारण 45 दिन की समय सीमा में कर दिया जाता है। हालांकि, आपत्ति वाले मामलों में समय लगना स्वाभाविक है। फिर भी, वे कम से कम समय में मामलों के निस्तारण की कोशिश कर रहे हैं और पिछली बैठकों में इस संबंध में निर्देश भी दिए जा चुके हैं। स्थानीय अधिवक्ताओं का मानना है कि लंबित मामलों के निस्तारण के लिए प्रशासन को अलग से व्यवस्था करनी चाहिए। Aligarh property news में यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है, जिस पर त्वरित ध्यान देने की आवश्यकता है।
