रमजान में लाउडस्पीकर पर यूपी सरकार का रुख स्पष्ट, सपा विधायक को दिया जवाब | UP Loudspeaker
उत्तर प्रदेश विधानसभा में रमजान के पवित्र महीने के दौरान मस्जिदों से सहरी और इफ्तार के समय लाउडस्पीकर के माध्यम से ऐलान की अनुमति को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस हुई। समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख्तर ने इस मुद्दे को उठाया, जिस पर राज्य सरकार ने अपना स्पष्ट रुख व्यक्त किया। यह मामला राज्य में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से जुड़े नियमों और परंपराओं के बीच संतुलन साधने की संवेदनशीलता को दर्शाता है, जिसका सीधा असर लाखों मुस्लिम समुदाय के लोगों पर पड़ता है।
शून्य काल के दौरान, सपा सदस्य कमाल अख्तर ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि अन्य सभी त्योहारों की तरह, रमजान भी एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है। उन्होंने बताया कि रमजान में रोजेदारों को सहरी (सुबह का भोजन) और इफ्तार (शाम का भोजन) के सही समय की जानकारी देने के लिए मस्जिदों से कुछ मिनटों के लिए ऐलान किया जाता है। अख्तर ने सरकार से अनुरोध किया कि चूंकि हाल ही में कई धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए गए हैं, इसलिए रमजान के महीने को देखते हुए मस्जिदों से ऐलान की अनुमति दी जाए ताकि लोगों को सुविधा मिल सके।
इस पर वित्त मंत्री एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट आदेश हैं, जिसके तहत रात 10 बजे के बाद इसका उपयोग वर्जित है। खन्ना ने सहरी और इफ्तार के समय ऐलान की परंपरा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह उस दौर की बात है जब घड़ियों का चलन नहीं था और लोग समय का आकलन धूप देखकर करते थे। उन्होंने आधुनिक समय का हवाला देते हुए कहा कि आज हर व्यक्ति के पास मोबाइल फोन है जिसमें समय देखा जा सकता है, इसलिए अब इसकी आवश्यकता नहीं है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार किसी की धार्मिक मान्यताओं में हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन तेज आवाज वाली व्यवस्था पर उच्चतम न्यायालय के आदेश लागू होते हैं।
कमाल अख्तर ने मंत्री के जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय का आदेश आवाज की तीव्रता को लेकर है, न कि लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध को लेकर। उन्होंने मंत्री से “मन बड़ा करके” रमजान के लिए यह अनुमति देने का अनुरोध किया, हालांकि मंत्री ने इस पर कोई अतिरिक्त प्रतिक्रिया नहीं दी। यह घटना `UP Loudspeaker` नीति पर सरकार के अडिग रुख को दर्शाती है।
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